आय छिपाने के बेबुनियाद आरोप पर क्लेम खारिज नहीं कर सकती बीमा कंपनी, उपभोक्ता आयोग ने दिया 1 करोड़ रुपये के भुगतान का आदेश

आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक अहम फैसले में बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह सड़क दुर्घटना में मारे गए स्टोन फैक्ट्री मालिक की विधवा को 1 करोड़ रुपये की बीमा राशि का तुरंत भुगतान करे। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी केवल अप्रमाणित आरोपों या आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर पॉलिसीधारक द्वारा आय छिपाने का दावा कर वैध क्लेम खारिज नहीं कर सकती।

आयोग के अध्यक्ष करणम किशोर कुमार तथा सदस्य एन नारायण रेड्डी और एस नज़ीमा कौसर की पीठ ने 28 अगस्त के अपने आदेश में कहा कि दुर्घटना के समय पॉलिसी प्रभावी थी और बीमित व्यक्ति की मृत्यु पूरी तरह साबित हो चुकी है। ऐसे में नॉमिनी होने के नाते मृतक की पत्नी पूरे 1 करोड़ रुपये के बीमा लाभ की हकदार हैं। पीठ ने क्लेम खारिज करने को सेवा में गंभीर कमी करार देते हुए कंपनी को 45 दिनों के भीतर 1 करोड़ रुपये की बीमित राशि के अलावा मानसिक प्रताड़ना के एवज में 25,000 रुपये और मुकदमा खर्च के रूप में 10,000 रुपये चुकाने का आदेश सुनाया।

आंतरिक जांच रिपोर्ट धोखाधड़ी का पुख्ता कानूनी सबूत नहीं

बीमा कंपनी ने दावा खारिज करने के पक्ष में मुख्य रूप से अपने जांच अधिकारी की रिपोर्ट, बैंक खातों के विवरण और मृतक के बेटे के कथित बयान को आधार बनाया था। कंपनी का कहना था कि बेटे ने जांच के दौरान यह माना था कि पॉलिसी हासिल करने के लिए पिता की आय बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाई गई थी।

आयोग ने इस दलील को सिरे से नकारते हुए टिप्पणी की कि बीमा कंपनी की आंतरिक जांच रिपोर्ट केवल उसके अपने जांचकर्ता के व्यक्तिगत निष्कर्ष होते हैं। इसे कानूनन धोखाधड़ी या जानबूझकर की गई गलत बयानी का अंतिम और अकाट्य प्रमाण नहीं माना जा सकता। बेटे के कथित बयान पर पीठ ने रेखांकित किया कि बीमा कंपनी यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रही कि यह टिप्पणी कोई स्पष्ट और निर्विवाद स्वीकारोक्ति थी। आयोग ने यह भी जोड़ा कि यदि ऐसी कोई बात कही भी गई हो, तो भी उससे यह सिद्ध नहीं होता कि प्रस्ताव पत्र (प्रपोजल फॉर्म) भरते समय पॉलिसीधारक की वास्तविक मंशा क्या थी।

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सड़क हादसे के समय वैध थी पॉलिसी

मामले के अनुसार, मृतक व्यवसायी ने 13 मार्च 2024 को 1 करोड़ रुपये का बीमा कवर लिया था, जिसकी वैधता 11 मार्च 2027 तक थी। शर्तों के तहत दुर्घटना में मृत्यु होने पर नॉमिनी को मूल बीमित राशि के साथ दुर्घटना मृत्यु लाभ मिलना तय था।

पॉलिसी शुरू होने के एक वर्ष से अधिक समय बाद, 28 जुलाई 2025 को रात करीब 8:45 बजे व्यवसायी जब एक मिनी ट्रक में जा रहे थे, तभी वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। सिर और पैर में आई गंभीर चोटों के बाद उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पर्याप्त वित्तीय साधन होने के बावजूद क्लेम खारिज करने पर आयोग सख्त

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पति की मौत के बाद जब पत्नी ने सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ क्लेम दायर किया, तो बीमा कंपनी ने 23 अक्टूबर 2025 को पत्र भेजकर दावा खारिज कर दिया। कंपनी के वकील पल्ले निरंजन कुमार ने तर्क दिया कि पॉलिसीधारक ने आय के संबंध में गलत तथ्य पेश किए थे और धोखाधड़ी की स्थिति में कंपनी को क्लेम रद्द करने का संविदात्मक अधिकार है।

इसके उलट, शिकायतकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता शिव सुदर्शन ने आयोग को बताया कि मृतक पिछले 10 वर्षों से स्टोन कारोबार से जुड़े थे। उनके पास अपनी स्टोन पॉलिशिंग फैक्ट्री, कृषि भूमि और कई लॉरियां थीं। उनके पास प्रीमियम का भुगतान करने के लिए पर्याप्त आय और वित्तीय संसाधन मौजूद थे, इसलिए आय छिपाने का आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत है।

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आयोग ने अपने फैसले में कहा कि बीमा कंपनी ने पॉलिसीधारक के प्रस्ताव की विधिवत समीक्षा की थी, प्रीमियम स्वीकार किया था और जोखिम वहन करने की हामी भरी थी। ऐसे में केवल आय बढ़ा-चढ़ाकर बताने के असत्यापित आरोप पर क्लेम को खारिज करना विधि सम्मत नहीं ठहराया जा सकता।

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