मुकदमे में देरी और लगभग पांच साल की कैद का हवाला देते हुए यूएपीए मामले में दो आरोपियों को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत

लंबे समय से जेल में बंद होने और ट्रायल के जल्द पूरा होने की कोई उम्मीद न दिखने के आधार पर दिल्ली हाईकोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के 2021 के एक मामले में दो आरोपियों को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि महिला आरोपी के पक्ष में जमानत का तर्कसंगत आधार है, वहीं पुरुष आरोपी के मामले में एनआईए द्वारा पेश सामग्री के मुकाबले उसकी लंबी हिरासत अवधि का पलड़ा भारी है।

जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुदेजा की पीठ ने 3 सितंबर के अपने आदेश में कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों और उसके जेल में बिताए गए लंबे समय की तुलना करने पर वह जमानत का हकदार बनता है। अदालत ने रेखांकित किया कि मामले में नामित कुल 359 गवाहों में से अभियोजन पक्ष अब तक केवल 21 गवाहों से ही पूछताछ कर पाया है, जिससे साफ है कि सुनवाई जल्द खत्म होने की कोई संभावना नहीं है। पीठ ने स्पष्ट किया कि ये टिप्पणियां सिर्फ जमानत याचिकाओं के निस्तारण के लिए हैं और इनका मुख्य ट्रायल के गुण-दोष पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

साजिश के आरोप और धीमी सुनवाई

यह पूरा प्रकरण जम्मू-कश्मीर में सक्रिय एक आतंकी संगठन के सदस्यों और सहयोगियों द्वारा रची गई कथित बड़ी साजिश से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि यह नेटवर्क स्थानीय नौजवानों को भड़काने, उन्हें हथियारों और विस्फोटकों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण देने तथा संगठन में भर्ती करने का काम कर रहा था।

मामले में राहत पाने वाली 33 वर्षीय सोबिया अजीज 22 अक्टूबर 2021 से हिरासत में थीं। जांच एजेंसी का दावा था कि उनके घर की तलाशी में कई डायरियां बरामद हुई थीं, जिनमें शरीयत कानून, इस्लामिक स्टेट की विचारधारा और जिहादी सामग्री से जुड़े हाथ से लिखे नोट मिले थे। इसके अलावा उनके परिसर से इस्लामिक स्टेट का झंडा मिलने का भी आरोप लगाया गया था।

READ ALSO  दिल्ली जिला अदालत हड़ताल: रोहिणी कोर्ट विवाद के बाद जज का तबादला, वकीलों ने वापस लिया प्रदर्शन का फैसला

अजीज की ओर से पेश हुए वकीलों—कार्तिक वेणु, अर्जन अजई सिंह चोंकर, जूड रोहित, अग्रिम टंडन और अलीशा शारदा—ने दलील दी कि उनका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह यूएपीए के कुछ आरोपों से पहले ही बरी हो चुकी हैं। वकीलों ने कहा कि कई सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। बचाव पक्ष का यह भी तर्क था कि जिस गाड़ी में हथियार ले जाए जाने का आरोप है, उसमें केवल मौजूद होने से यह साबित नहीं होता कि उन्हें भीतर रखे सामान की जानकारी थी।

डिजिटल साक्ष्य बनाम आतंकी संलिप्तता

READ ALSO  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रायबरेली बार एसोसिएशन में 'कोषाध्यक्ष' पद का चुनाव टाला, मतदाता सूची से हटाए गए लाइफ मेंबर की आपत्ति सुनने का निर्देश दिया

पीठ ने मामले के दूसरे आरोपी कामरान अशरफ रेशी को भी रिहा करने का निर्देश दिया। रेशी को 20 अक्टूबर 2021 को गिरफ्तार किया गया था, जब उनकी उम्र करीब 21 वर्ष थी। अपनी नामिनल रोल के मुताबिक वह भी लगभग पांच साल जेल में बिता चुके हैं। एनआईए ने आरोप लगाया था कि रेशी पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों, आतंकी संगठनों और ऑनलाइन दुष्प्रचार समूहों के संपर्क में थे, उनके पास से धमकी भरा पर्चा मिला था और वह हथियारबंद संघर्ष के लिए युवाओं को उकसाने वाले भाषणों में शामिल हुए थे।

रेशी के कानूनी दल ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप मुख्य रूप से डिजिटल बातचीत से जुड़े हैं और किसी भी हिंसक या आतंकी गतिविधि में उनकी जमीनी भूमिका का कोई सबूत नहीं है। वकीलों ने बताया कि उनके घर से मिला कथित पर्चा महज एक पन्ने का था, और ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि उन्होंने वह पर्चा खुद तैयार किया था या उसे बांटने में शामिल थे।

अभियोजन का कड़ा विरोध

एनआईए की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक अमित तिवारी ने दोनों आरोपियों की जमानत अर्जी का पुरजोर विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि दोनों देश के खिलाफ जंग छेड़ने और आतंकी गतिविधियों को मदद पहुंचाने की एक बड़ी साजिश में शामिल थे। एजेंसी ने अदालत के सामने यह आशंका भी जताई कि जेल से बाहर आने पर आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं और मुकदमे की प्रक्रिया को बाधित कर सकते हैं।

READ ALSO  आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने माओवादी नेताओं के शवों की मांग वाली याचिकाएं निस्तारित कीं; परिजनों को छत्तीसगढ़ पुलिस से संपर्क करने की दी छूट

विदेश यात्रा और इंटरनेट के इस्तेमाल पर कड़ी शर्तें

दोनों आरोपियों को जमानत पर रिहा करने के साथ ही हाईकोर्ट ने उन पर कई सख्त पाबंदियां भी लगाई हैं।

अदालत ने निर्देश दिया कि दोनों आरोपी ट्रायल कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना भारत से बाहर नहीं जाएंगे। यात्रा की अनुमति मांगते समय उन्हें अपने जाने की जगह, ठहरने की अवधि, यात्रा का मकसद और उस दौरान संपर्क की पूरी जानकारी देनी होगी। इसके अलावा अदालत ने उन्हें किसी भी ऐसे व्हाट्सएप ग्रुप या सोशल मीडिया मंच से जुड़ने से मना किया है जहां देशविरोधी सामग्री डाली, साझा या प्रसारित की जाती हो। दोनों पर किसी भी सोशल मीडिया मंच या अन्य माध्यम से ऐसी किसी भी सामग्री को अपलोड, साझा या वितरित करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles