बॉम्बे हाईकोर्ट ने नवी मुंबई स्थित चार सितारा होटल ‘पार्क इन बाय रेडिसन’ का खाद्य लाइसेंस निलंबित करने के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 95 प्रतिशत अनुपालन वाले होटल की रसोई में महज दो कीड़े मिलने के आधार पर पूरी गतिविधि को रोक देना अत्यधिक कठोर कदम है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायाधीश गौतम अंखाड की पीठ ने बुधवार को एफएसएसएआई (FSSAI) लाइसेंस को तत्काल बहाल कर होटल को भोजन परिचालन पुनः शुरू करने की अनुमति प्रदान की।
एफडीए ने 2 जुलाई को किए गए एक औचक निरीक्षण के बाद 3 जुलाई को होटल के लाइसेंस को निलंबित कर दिया था। नियामक निकाय ने स्वच्छता, भोजन भंडारण और रखरखाव में गंभीर कमियों का आरोप लगाया था। हालांकि, जांच रिपोर्ट के अनुसार होटल ने 95 प्रतिशत अनुपालन अंक हासिल किए थे, लेकिन रसोई क्षेत्र में दो छोटे कीड़े मिलने के कारण यह दंडात्मक कार्रवाई की गई थी। इसके खिलाफ होटल प्रबंधन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एफडीए के फैसले को मनमाना और असंगत बताया था।
कार्रवाई पर हाईकोर्ट की व्यावहारिक टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि नियमों का प्रवर्तन व्यावहारिक दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की, “हम भारत में हैं, हमें व्यावहारिक रुख अपनाना होगा।” पीठ ने रेखांकित किया कि जब किसी प्रतिष्ठान का समग्र स्वच्छता रिकॉर्ड संतोषजनक हो, तो केवल दो कीड़ों की मौजूदगी जैसे एकल निष्कर्ष के आधार पर लाइसेंस निलंबन को सही नहीं ठहराया जा सकता।
सुनवाई के दौरान हल्के-फुल्के अंदाज में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश घुगे ने कहा, “पिछले हफ्ते हमारे डेस्क पर भी एक कॉकरोच था और एक मक्खी भी घूम रही थी।”
एफडीए का पक्ष और अपील का तर्क
राज्य सरकार की ओर से पेश सरकारी वकील नेहा भिड़े ने एफडीए की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों में कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने तर्क दिया, “चाहे एक कीड़ा मिले या दस, इससे फर्क नहीं पड़ता। इस विषय पर गैर-अनुपालन को स्वीकार नहीं किया जा सकता।” उन्होंने यह भी ध्यान दिलाया कि होटल सीधे अदालत आने के बजाय खाद्य सुरक्षा आयुक्त के समक्ष वैधानिक अपील दायर कर सकता था।
सरकारी वकील ने किसी भी प्रकार के पक्षपात से इनकार करते हुए कहा कि एफडीए बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी), सरकारी केईएम अस्पताल, क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (सीसीआई) और मुंबई के कई अन्य प्रतिष्ठित क्लबों की कैंटीनों में भी जांच की गई थी और खामियां पाए जाने पर उन्हें बंद कराया गया था।
सरकारी व अर्ध-सरकारी कैंटीनों की जांच के निर्देश
मामले का दायरा बढ़ाते हुए हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या खाद्य सुरक्षा मानकों को सभी जगह समान रूप से लागू किया जा रहा है। पीठ ने एफडीए को निर्देश दिया कि वह राज्य के सभी सरकारी और अर्ध-सरकारी खान-पान परिसरों का गहन निरीक्षण करे। इसमें हाईकोर्ट और मंत्रालय परिसर की कैंटीनें भी विशेष रूप से शामिल हैं।
अदालत ने एफडीए को इन सभी निरीक्षणों की विस्तृत रिपोर्ट और वीडियो रिकॉर्डिंग पेश करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को तय की गई है, जिसमें एफडीए को राज्य भर में की गई जांच का ब्योरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।

