पंजाब के होशियारपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ग्राहक के एक्स्ट्रा पैसे नहीं लौटाने के मामले में श्री सत्य पैकर्स एंड मूवर्स को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार आचरण का दोषी ठहराया है। आयोग ने ट्रांसपोर्ट कंपनी को ग्राहक के 26,080 रुपये 9 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, मानसिक उत्पीड़न और असुविधा के एवज में 10,000 रुपये का मुआवजा देने का भी हुक्म सुनाया है।
आयोग के अध्यक्ष नवीन पुरी और सदस्य प्रेम सिंह सलारिया की पीठ ने 8 जुलाई को यह फैसला सुनाते हुए कंपनी को आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर पूरी राशि का भुगतान करने की मोहलत दी है। ब्याज की गणना शिकायत दर्ज होने की तारीख यानी 20 मार्च 2025 से वसूली होने तक की जाएगी।
रीइम्बर्समेंट के लिए किया था दोबारा भुगतान
यह विवाद मध्य प्रदेश के भोपाल से पंजाब के होशियारपुर सामान शिफ्ट करने से जुड़ा है। ग्राहक विकल्प सिंह ने इसके लिए श्री सत्य पैकर्स एंड मूवर्स की सेवाएं ली थीं। कंपनी ने 15 फरवरी 2024 को 66,080 रुपये का बिल जारी किया था, जिसका भुगतान विकल्प ने शुरुआत में कुछ नकद और कुछ अपने दोस्त के यूपीआई खाते से कर दिया था।
दफ्तर से रीइम्बर्समेंट का दावा करने के लिए विकल्प सिंह को अपने खुद के बैंक खाते से पूरे भुगतान की यूपीआई रसीद की आवश्यकता थी। इसके लिए उन्होंने कंपनी के प्रतिनिधि राजीव दुबे से बात की। तय समझौते के अनुसार, विकल्प ने 21 मार्च 2024 को अपने खाते से 66,080 रुपये का पूरा यूपीआई ट्रांसफर कर दिया, ताकि पिछला भुगतान उन्हें तुरंत वापस मिल सके।
कंपनी ने रोकी बकाया राशि, नोटिस के बाद भी नहीं दिया जवाब
दूसरा भुगतान मिलने के बाद पैकर्स एंड मूवर्स ने विकल्प सिंह को केवल 40,000 रुपये ही वापस किए और बाकी 26,080 रुपये रोक लिए। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब कंपनी ने पैसे नहीं लौटाए, तो ग्राहक ने 14 सितंबर 2024 को कानूनी नोटिस भेजा। इसके बाद भी कोई राहत न मिलने पर उन्होंने 20 मार्च 2025 को उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
मामले की सुनवाई के दौरान नोटिस तामील होने के बावजूद श्री सत्य पैकर्स एंड मूवर्स का कोई प्रतिनिधि आयोग के समक्ष पेश नहीं हुआ और न ही निर्धारित समय सीमा में कोई जवाब दाखिल किया गया। इसके चलते आयोग ने मामले में एकतरफा कार्यवाही की।
दस्तावेजी सबूतों के आधार पर फैसला
आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता द्वारा पेश किए गए मूल बिल, बैंक स्टेटमेंट, यूपीआई ट्रांजैक्शन रसीदें, डाक रसीदें, लीगल नोटिस और शपथ पत्र कानूनी रूप से अकाट्य रहे, क्योंकि विपक्षी पक्ष ने उनका कोई खंडन नहीं किया।
पीठ ने अपने फैसले में कहा कि बिना किसी वैध कानूनी कारण के ग्राहक का अतिरिक्त पैसा अपने पास दबाकर रखना सेवा में गंभीर लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार है। आयोग ने स्पष्ट किया कि 21 मार्च 2024 को 66,080 रुपये का सफल ट्रांसफर साबित होता है और ग्राहक अपनी बकाया राशि पाने का पूर्ण हकदार है।
अत्यधिक मुआवजे का दावा खारिज
शिकायतकर्ता ने याचिका में 10 लाख रुपये का मुआवजा और 25,000 रुपये कानूनी खर्च के रूप में दिलाने की मांग की थी। हालांकि, आयोग ने इस मांग को अत्यधिक और लेनदेन की मूल राशि के अनुपात से बहुत ज्यादा मानते हुए खारिज कर दिया।
आयोग ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता मंचों का उद्देश्य प्रभावित ग्राहक को हुए वास्तविक नुकसान और मानसिक कष्ट की भरपाई करना है, न कि उन्हें किसी प्रकार का अनुचित आर्थिक लाभ देना। इसी आधार पर आयोग ने न्यायसंगत क्षतिपूर्ति और ब्याज दर तय करते हुए शिकायत का आंशिक रूप से निपटारा किया।

