कन्नूर छात्र खुदकुशी मामला: आरोपी की रिहाई पर हाईकोर्ट सख्त, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर जताया संदेह, 24 जुलाई को व्यक्तिगत पेशी के आदेश

कन्नूर के एक निजी डेंटल कॉलेज के छात्र की संदिग्ध खुदकुशी के मामले में मुख्य आरोपी विभागाध्यक्ष को गिरफ्तारी के बाद तुरंत रिहा किए जाने पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने प्रथम दृष्टया वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा आरोपी को बचाने की साजिश का संदेह जताते हुए जांच अधिकारी और क्राइम ब्रांच के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को 24 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने के सख्त निर्देश दिए हैं।

पुलिस की मंशा पर अदालत का गंभीर संदेह

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने कहा कि यह स्वीकार करना बेहद कठिन है कि डिप्टी सुपरिनटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) स्तर के एक अनुभवी जांच अधिकारी को यह कानूनी नियम न पता हो कि गिरफ्तार व्यक्ति को अदालत में पेश करते समय गिरफ्तारी के लिखित आधार सौंपना अनिवार्य होता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अधिकारी की इस लापरवाही से साफ संकेत मिलता है कि आरोपी को हिरासत से बचाने के लिए पुलिस अधिकारियों ने मिलकर काम किया।

निचली अदालत और पुलिस से मांगे गए दस्तावेज

हाईकोर्ट ने मामले की जांच कर रहे डीएसपी को 24 जुलाई 2026 की सुबह 10:45 बजे पेश होने का हुक्म दिया है। जांच अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे गिरफ्तारी से पूर्व की सभी कानूनी औपचारिकताओं के पालन पर हलफनामा दायर करें और निचली अदालत में जमा किए गए सभी कागजात की स्पष्ट प्रतियां पेश करें। इसके साथ ही अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत गठित विशेष अदालत के न्यायाधीश को भी निर्देश दिया गया है कि वे आरोपी की रिहाई से जुड़े आदेश और सभी दस्तावेज हाईकोर्ट को भेजें। हाईकोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि आरोपी को रिहा करने से पहले मृतक के परिवार का पक्ष नहीं सुना गया था।

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एसआईटी का गठन और विभागीय जांच

राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने हाईकोर्ट को जानकारी दी कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पुरानी जांच टीम को हटाकर एक नई विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन कर दिया गया है। इसके अलावा पुलिस की इस चूक या साठगांठ की विभागीय जांच कराने की बात भी कही गई है। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार द्वारा जांच टीम बदला जाना इस संदेह को और पुख्ता करता है कि शुरुआती जांच में शीर्ष अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध थी।

कक्षा में प्रताड़ना के बाद छात्र की मौत

अंजराकांडी स्थित एक निजी डेंटल कॉलेज में विभागाध्यक्ष डॉ. एम. के. राम पर आरोप है कि उन्होंने अपनी ही संस्था के अनुसूचित जाति वर्ग के छात्र नितिन राज को कक्षा के दौरान मानसिक रूप से प्रताड़ित और अपमानित किया था। इस घटना के बाद 10 अप्रैल को कॉलेज परिसर की इमारत से गिरकर नितिन की मौत हो गई थी, जिसे पुलिस संदिग्ध खुदकुशी मानकर जांच कर रही है।

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फरार आरोपी का नाटकीय घटनाक्रम

घटना के बाद डॉ. राम गिरफ्तारी से बचने के लिए कर्नाटक भाग गए थे। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद पुलिस ने उन्हें कर्नाटक से हिरासत में लिया और सोमवार को आधिकारिक रूप से गिरफ्तारी दर्ज की। हालांकि, उसी दिन जब उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया, तो पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के कानूनी आधार पेश न करने की तकनीकी चूक के कारण अदालत ने उन्हें तुरंत रिहा कर दिया।

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