आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, एम्स निदेशक को मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) के निदेशक को एक मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया है, जो नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करेगा। आसाराम ने चिकित्सीय आधार पर अंतरिम जमानत की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया है।

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने विशेषज्ञ डॉक्टरों की इस समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा है। पीठ ने साफ किया कि जब तक मेडिकल रिपोर्ट से यह स्पष्ट नहीं हो जाता कि स्वास्थ्य कारणों से जमानत आवश्यक है, तब तक नियमित जमानत पर विचार नहीं किया जाएगा।

अदालत में दलीलें और सॉलिसिटर जनरल का विरोध

सुनवाई के दौरान आसाराम के वकील ने अनुरोध किया कि उनके मुवक्किल का मामला एम्स निदेशक के पास भेजा जाए, ताकि डॉक्टरों की टीम यह जांच सके कि क्या उन्हें अस्पताल में भर्ती किए जाने की जरूरत है।

जमानत याचिका का विरोध करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि महज तीन महीने पहले आसाराम ने काशी विश्वनाथ और अयोध्या की यात्राएं की थीं। तुषार मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ता ने पूर्व में खुद को अचेत अवस्था (वेजिटेटिव स्टेट) में बताकर जमानत ली थी, जबकि वास्तविकता यह है कि वे आराम से आवाजाही कर रहे हैं।

READ ALSO  बिना उचित नोटिस के पारित किया गया एकपक्षीय आदेश प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन करता है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने निर्णय को रद्द किया

कानूनी पृष्ठभूमि और हाईकोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश राजस्थान हाईकोर्ट के 27 मई के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें हाईकोर्ट ने 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में आसाराम की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। यद्यपि हाईकोर्ट ने उन्हें आईपीसी और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत सामूहिक दुष्कर्म व गंभीर यौन हमले के विशिष्ट आरोपों से मुक्त कर दिया था, लेकिन आईपीसी की धारा 376(2)(एफ) के तहत दुष्कर्म का दोषी मानते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा कायम रखी।

READ ALSO  आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देने के लिए अनुच्छेद 226 और BNNS धारा 528 के तहत याचिका कब सुनवाई योग्य होगी? सुप्रीम कोर्ट ने समझाया

इसके अतिरिक्त, हाईकोर्ट ने गलत तरीके से बंधक बनाने (आईपीसी धारा 342), मानव तस्करी (धारा 370(4)), आपराधिक धमकी (धारा 506), महिला की लज्जा का अनादर करने (धारा 509) और यौन उत्पीड़न (धारा 354ए) के तहत भी दोषसिद्धि को सही ठहराया था। साथ ही पॉक्सो अधिनियम की धारा 7/8 और किशोर न्याय (जेजे) अधिनियम की धारा 23 के तहत मिली सजाएं भी बरकरार रखी गईं।

आसाराम को पहली बार 25 अप्रैल 2018 को अपने आश्रम में एक नाबालिग छात्रा का यौन उत्पीड़न करने का दोषी ठहराया गया था और विभिन्न धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles