CBSE 12th Results: ‘डिजिटल मार्किंग’ पर बड़ा विवाद, हाईकोर्ट पहुंची NSUI; स्वतंत्र जांच और मैनुअल री-चेकिंग की मांग

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों को लेकर खड़ा हुआ विवाद अब देश की न्यायपालिका की दहलीज पर पहुंच चुका है। कांग्रेस के छात्र विंग नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। इस याचिका में सीबीएसई की ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। अदालत की अवकाशकालीन पीठ (Vacation Bench) आगामी 8 जून को इस संवेदनशील मामले पर सुनवाई कर सकती है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में तकनीकी खामियों, खराब स्कैनिंग और अंकों के मिलान में हुई बड़ी चूकों के कारण हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।

आंकड़ों में संकट की गंभीरता: क्या वाकई कोई बड़ी चूक हुई है?

NSUI ने अपनी याचिका में सीबीएसई के ही आधिकारिक बयानों और आंकड़ों का हवाला देकर यह साबित करने की कोशिश की है कि यह समस्या किसी छोटे समूह तक सीमित नहीं है।

  • बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, परीक्षा परिणाम आने के ठीक बाद उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां हासिल करने वाले ऑनलाइन पोर्टल पर भारी ट्रैफिक के कारण तकनीकी खराबी आ गई थी।
  • बेहद कम समय के भीतर, बोर्ड को करीब 127,146 आवेदन प्राप्त हुए, जो कुल 387,399 स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं से संबंधित थे।
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याचिका में कहा गया है, “इतनी बड़ी संख्या में छात्रों द्वारा परिणाम घोषित होते ही कॉपियों की स्कैन कॉपी मांगना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि छात्रों में मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर गहरा अविश्वास और चिंता है। इसे महज एक सामान्य प्रक्रिया मानकर टाला नहीं जा सकता।”

कोर्ट से छात्रों की प्रमुख मांगें

अधिवक्ता ऋषभ रंजन, अजय छिकारा, उमर होदा और ईशा बख्शी के माध्यम से दायर की गई इस याचिका में केंद्र सरकार और सीबीएसई दोनों को पक्षकार बनाया गया है। प्रभावित छात्रों के हितों की रक्षा के लिए याचिका में निम्नलिखित मांगें की गई हैं:

  1. स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच: सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली (OSM) की कार्यप्रणाली और उसकी कमियों की जांच के लिए एक स्वतंत्र कमेटी का गठन किया जाए।
  2. शारीरिक सत्यापन (Manual Verification): पीड़ित छात्रों के लिए कॉपियों की फिजिकल जांच और पारंपरिक तरीके से री-चेकिंग की व्यवस्था की जाए, क्योंकि मौजूदा डिजिटल शिकायत निवारण तंत्र नाकाफी है।
  3. पोर्टल की समय सीमा बढ़ाना: सीबीएसई को आदेश दिया जाए कि वह री-वैल्यूएशन और वेरिफिकेशन पोर्टल को कम से कम एक महीने के लिए खुला रखे।
  4. मुआवजा अंक (Compensatory Marks): जिन छात्रों की मूल उत्तर पुस्तिकाएं गुम हो गई हैं या स्कैनिंग की खराबी के कारण धुंधली और अपठनीय हैं, उन्हें हर्जाने के तौर पर अतिरिक्त अंक दिए जाएं।
  5. भविष्य के लिए सुरक्षा मानक: भविष्य में डिजिटल मूल्यांकन को पारदर्शी बनाने के लिए कड़े और सुरक्षित नियम तय किए जाएं।
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छात्रों के करियर पर मंडराता खतरा

इस वर्ष सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में लगभग 1.11 लाख छात्रों को अनुत्तीर्ण (फेल) घोषित किया गया है, जबकि कॉपियों के दोबारा सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए 1.29 लाख से अधिक छात्रों ने पहले ही आवेदन कर दिया है।

इस मुद्दे पर बोलते हुए NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा, “संस्था की प्रशासनिक और तकनीकी कमियों का खामियाजा छात्रों को भुगतने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। बोर्ड की डिजिटल प्रणाली की विफलता से देश के होनहार युवाओं का कीमती शैक्षणिक वर्ष बर्बाद हो रहा है।”

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उल्लेखनीय है कि 12वीं के अंक ही छात्रों के विश्वविद्यालयों में दाखिले, प्रोफेशनल कोर्सेज की पात्रता और स्कॉलरशिप के अवसरों को तय करते हैं। ऐसे में देरी या लापरवाही छात्रों के पूरे करियर को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है। अब सभी की निगाहें 8 जून को होने वाली दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं।

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