टेरर फंडिंग मामला: पिता के निधन के बाद बारामूला के सांसद ‘इंजीनियर रशीद’ को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली अंतरिम जमानत, कोर्ट ने रखीं सख्त शर्तें

दिल्ली हाईकोर्ट ने टेरर फंडिंग (आतंकी वित्तपोषण) के आरोपी और बारामूला से सांसद अब्दुल राशिद शेख, जिन्हें ‘इंजीनियर रशीद’ के नाम से जाना जाता है, को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनके पिता के निधन के बाद मानवीय आधार पर उन्हें 2 जून तक के लिए अंतरिम जमानत मंजूर की है। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने रशीद को अपने पिता के जनाजे (दफन) में शामिल होने और अंतिम संस्कार की पारंपरिक रस्मों को निभाने के लिए यह अस्थायी राहत प्रदान की है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के वकील अक्षय मलिक ने अदालत के समक्ष इस बात की पुष्टि की कि याचिकाकर्ता (अब्दुल राशिद शेख) के पिता का निधन 17 और 18 मई की दरमियानी रात को हुआ था। इस तथ्यात्मक पुष्टि के बाद, अदालत ने रशीद को अपने परिवार के साथ इस दुखद समय में शामिल होने की अनुमति दी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत की यह अवधि मुख्य रूप से केवल उनके पिता के शोक से जुड़े धार्मिक और पारंपरिक अनुष्ठानों को पूरा करने के लिए दी जा रही है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने सात पन्नों के आदेश में रशीद की रिहाई के साथ बेहद सख्त शर्तें भी जोड़ी हैं। चूंकि मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए उनकी सुरक्षा और निगरानी के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

अदालत ने आदेश दिया है कि अंतरिम जमानत की पूरी अवधि के दौरान कम से कम दो सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी हर समय बारामूला सांसद के साथ मुस्तैद रहेंगे।

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न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा:

“ये पुलिस अधिकारी संबंधित जेल से उनकी यात्रा शुरू होने से लेकर श्रीनगर से उनकी वापसी तक लगातार उनके साथ रहेंगे… पारंपरिक रीति-रिवाजों को पूरा करने के लिए, अपीलकर्ता को केवल कब्रिस्तान या किसी अन्य पूजा स्थल पर जाने की अनुमति होगी। इन चिन्हित स्थानों के अलावा, उन्हें कहीं भी और जाने की इजाजत नहीं होगी।”

अब्दुल राशिद शेख पिछले छह साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं। उन्हें साल 2019 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी NIA का आरोप है कि वह जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों को हवा देने और आतंकी संगठनों को अवैध रूप से धन पहुंचाने (टेरर फंडिंग) की एक बड़ी साजिश का हिस्सा थे। तब से वह लगातार न्यायिक हिरासत में हैं और अब पिता के निधन के कारण उन्हें पहली बार इस तरह की अंतरिम राहत मिली है।

अदालत के आदेश के अनुसार, अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होते ही रशीद को 2 जून को वापस जेल प्राधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।

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