फालता पुनर्मतदान: TMC उम्मीदवार जहांगीर खान पहुंचे कलकत्ता हाई कोर्ट, पुलिस की दंडात्मक कार्रवाई से मांगी सुरक्षा

पश्चिम बंगाल की फालता विधानसभा सीट पर होने वाले पुनर्मतदान से ठीक तीन दिन पहले राजनीतिक और कानूनी सरगर्मी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रत्याशी जहांगीर खान ने पुलिसिया कार्रवाई से सुरक्षा की गुहार लगाते हुए सोमवार, 18 मई 2026 को कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया। खान का आरोप है कि उन्हें निशाना बनाते हुए उनके खिलाफ लगातार आपराधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने इस मामले की गंभीरता और तात्कालिकता को देखते हुए याचिकाकर्ता की जल्द सुनवाई की मांग को स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने कहा कि वह इस याचिका पर आज ही बाद में सुनवाई करेगा।

यह कानूनी विवाद दक्षिण 24 परगना जिले की फालता विधानसभा सीट पर होने वाले कड़े चुनावी मुकाबले के बीच खड़ा हुआ है।

इस सीट पर पहले चरण के तहत 29 अप्रैल 2026 को मतदान कराया गया था। हालांकि, वोटिंग के दिन बड़े पैमाने पर धांधली और चुनावी अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने वहां के मतदान को रद्द (Countermanded) कर दिया था। इसके बाद आयोग ने स्थिति की समीक्षा करते हुए आगामी 21 मई 2026 को इस क्षेत्र में दोबारा मतदान (Repoll) कराने की घोषणा की।

अब मतदान की तारीख बेहद नजदीक होने के कारण टीएमसी उम्मीदवार ने कानूनी संरक्षण के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

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कलकत्ता उच्च न्यायालय में टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान का पक्ष रखते हुए उनके वरिष्ठ वकील और पश्चिम बंगाल के पूर्व महाधिवक्ता (Advocate General) किशोर दत्ता ने तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

दत्ता ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि चुनाव प्रचार के महत्वपूर्ण समय में उनके मुवक्किल को परेशान करने और उनकी आवाजाही को रोकने के उद्देश्य से लगातार नए मामले थोपे जा रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि मतदान से ऐन पहले पुलिस जहांगीर खान के खिलाफ कोई बड़ी दंडात्मक कार्रवाई कर सकती है, जिससे पूरी चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होगी।

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अपने मुवक्किल के अधिकारों की रक्षा के लिए वकील ने अदालत से मुख्य रूप से दो राहतें मांगीं:

  1. विभिन्न थानों में जहांगीर खान के खिलाफ अब तक दर्ज की गईं सभी प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) की पूरी सूची और विवरण सार्वजनिक किया जाए।
  2. चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने तक पुलिस को उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई (Coercive Action) करने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश जारी किया जाए।
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याचिकाकर्ता के वकील द्वारा चुनाव की तात्कालिकता का हवाला दिए जाने के बाद जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने मामले को टालने के बजाय त्वरित सुनवाई के लिए सहमति दे दी। कोर्ट आज सोमवार दोपहर बाद के सत्र में इस मामले पर विस्तृत दलीलें सुनेगा।

अब सबकी नजरें दोपहर बाद होने वाली कोर्ट की इस सुनवाई पर टिकी हैं, जिससे यह साफ होगा कि फालता के टीएमसी उम्मीदवार को दोबारा होने जा रहे मतदान से पहले राहत मिलती है या नहीं।

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