गुरुग्राम बच्ची दुष्कर्म मामला: एसआईटी की जांच पूरी, सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत में रिपोर्ट दाखिल करने की दी अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुरुग्राम में तीन साल की मासूम बच्ची के साथ हुए जघन्य दुष्कर्म मामले में विशेष जांच दल (SIT) को अपनी अंतिम रिपोर्ट निचली अदालत में पेश करने की अनुमति दे दी है। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले को पूरी तरह बंद नहीं किया है। अब कोर्ट का ध्यान सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों की भूमिका और पीड़ित बच्ची को मिलने वाले मुआवजे की समीक्षा पर रहेगा।

चीफ जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जोयमलया बागची की बेंच ने एसआईटी को आदेश दिया कि वह अपनी जांच रिपोर्ट संबंधित पुलिस स्टेशन के माध्यम से गुरुग्राम स्थित महिला पॉक्सो (POCSO) जज के सामने पेश करे। गौरतलब है कि इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने तीन वरिष्ठ महिला आईपीएस अधिकारियों—एडीजीपी कला रामचंद्रन, एसपी डॉ. अंशु सिंगला और डीसीपी जसलीन कौर—की एसआईटी गठित की थी।

बेंच ने तय समय सीमा के भीतर जांच पूरी करने के लिए एसआईटी की सराहना की। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को निर्देश दिया कि इस मामले की सुनवाई के लिए एक महिला न्यायिक अधिकारी की अध्यक्षता वाली विशेष पॉक्सो अदालत नियुक्त की जाए, ताकि पीड़िता को एक सुरक्षित और संवेदनशील माहौल मिल सके।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हरियाणा पुलिस और गुरुग्राम की बाल कल्याण समिति (CWC) के “शर्मनाक” और “गैर-जिम्मेदाराना” रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई थी। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा था, “शर्म आनी चाहिए! क्या कोई राज्य अपराधों से इसी तरह निपटता है? बच्ची ने उस अपराध से कहीं ज्यादा भयावह अनुभव बाद में झेले हैं।”

कोर्ट ने यह भी पाया कि पुलिस कमिश्नर से लेकर सब-इंस्पेक्टर तक, पूरी जांच प्रक्रिया में पीड़ित बच्ची की बातों को संदिग्ध साबित करने की कोशिश की गई। कोर्ट के अनुसार, ऐसा लगा मानो पुलिस पीड़ित के माता-पिता की चिंताओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और निराधार बताने का प्रयास कर रही थी।

हालांकि मुख्य अपराध की जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन पीड़ित के पिता की याचिका अभी भी लंबित है। कोर्ट अब निम्नलिखित पहलुओं पर विचार करेगा:

  1. सरकारी डॉक्टरों की भूमिका: घटना के बाद बच्ची का उपचार करने वाले सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों का व्यवहार और उनकी प्रतिक्रिया कैसी थी, इसकी जांच की जाएगी।
  2. मुआवजा: कोर्ट यह सुनिश्चित करेगा कि पीड़ित बच्ची को उचित और समय पर मुआवजा मिले ताकि उसके पुनर्वास में कोई बाधा न आए।
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यह दर्दनाक मामला गुरुग्राम के सेक्टर 54 की एक सोसाइटी का है, जहां दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच दो महीने तक तीन साल की बच्ची के साथ कथित तौर पर बार-बार दुष्कर्म किया गया। इस मामले में घर में काम करने वाली दो महिलाओं और उनके एक पुरुष साथी को आरोपी बनाया गया है।

बच्ची द्वारा अपनी मां को आपबीती सुनाने के बाद, 4 फरवरी को सेक्टर 53 पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी।

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