मेघालय हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: फेसबुक पोस्ट विवाद में पूर्व MDC के खिलाफ दर्ज सभी FIR एक साथ जोड़ने के निर्देश

मेघालय हाईकोर्ट ने पूर्व जिला परिषद सदस्य (MDC) सोफियोर रहमान के खिलाफ दर्ज तीन अलग-अलग प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) को एक साथ जोड़ने का आदेश दिया है। यह मामला गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (GHADC) चुनावों के दौरान एक फेसबुक पोस्ट से जुड़ी कथित हिंसा और सांप्रदायिक तनाव से संबंधित है।

चीफ जस्टिस रेवती मोहित डेरे की अध्यक्षता वाली पीठ ने रहमान द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह निर्देश जारी किया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि तीनों FIR एक ही सोशल मीडिया पोस्ट और एक ही घटनाक्रम पर आधारित हैं, इसलिए उनकी जांच अलग-अलग थानों के बजाय एक ही स्थान पर होनी चाहिए।

यह कानूनी विवाद इस साल मार्च में शुरू हुआ था, जब पूर्व MDC सोफियोर रहमान पर फेसबुक पर एक उत्तेजक पोस्ट साझा करने का आरोप लगा था। आरोप था कि यह पोस्ट विभिन्न समुदायों के बीच लोक व्यवस्था को बिगाड़ने और तनाव पैदा करने के लिए पर्याप्त थी। इसके बाद, भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत अराइमिल, सोंगसाक और तुरा पुलिस स्टेशनों में मामले दर्ज किए गए थे।

READ ALSO  उत्तराखंड रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट की हत्या: सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे की प्रगति पर स्थिति रिपोर्ट मांगी

यह घटनाक्रम उस समय हुआ जब गारो हिल्स क्षेत्र में भारी अशांति थी। राज्य सरकार द्वारा गैर-आदिवासियों को GHADC चुनाव लड़ने से रोकने वाली अधिसूचना जारी करने के बाद हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें दो लोगों की जान चली गई थी। इस अधिसूचना को बाद में हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था और हिंसा को देखते हुए 10 अप्रैल को होने वाले चुनाव भी स्थगित कर दिए गए थे।

रहमान के वकील ने अदालत में दलील दी कि एक ही कृत्य के लिए अलग-अलग थानों में कई FIR दर्ज करना कानून की नजर में सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि एक ही सोशल मीडिया पोस्ट के लिए कई जांचें चलाने से आरोपी का उत्पीड़न होता है और यह कानूनी प्रक्रिया का दोहराव है। याचिकाकर्ता ने जांच को सुव्यवस्थित करने के लिए सभी मामलों को क्लब करने की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने पाया कि तीनों FIR में लगाए गए आरोप पूरी तरह से एक ही फेसबुक पोस्ट से जुड़े हैं। कानूनी निरंतरता बनाए रखने के लिए, पीठ ने निर्देश दिया कि तुरा और सोंगसाक में दर्ज मामलों (जिन्हें बाद में अपराध शाखा को सौंप दिया गया था) को अब अराइमिल पुलिस स्टेशन स्थानांतरित किया जाए, जहां पहला मामला दर्ज किया गया था।

हाईकोर्ट ने पोस्ट की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि इसमें शामिल सामग्री “उत्तेजक और विभिन्न समुदायों के बीच सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने में सक्षम” थी। हालांकि, अदालत ने निर्देश दिया कि अब जांच कानूनी प्रावधानों के तहत एक ही स्थान पर आगे बढ़ेगी।

READ ALSO  ठेकेदारों या दुकानदारों को सरकारी वकील न बनायें; इसके बजाय अनुभवी वकीलों को कोर्ट भेजें: इलाहाबाद हाईकोर्ट

अदालत ने अपने आदेश में कहा, “इन निर्देशों का तत्काल पालन किया जाए। इसी के साथ याचिका का निपटारा किया जाता है।”

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles