असम मुख्यमंत्री ‘हेट स्पीच’ मामला: गौहाटी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दिया अंतिम मौका

गौहाटी हाईकोर्ट ने मंगलवार को असम सरकार को उन जनहित याचिकाओं (PILs) पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर दिया है, जिनमें मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर “अभद्र भाषा” (हेट स्पीच) का उपयोग करने का आरोप लगाया गया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार को 28 मई को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपना हलफनामा सकारात्मक रूप से दाखिल करना होगा।

मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार और न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने उन याचिकाओं के समूह पर सुनवाई की, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अल्पसंख्यक समुदायों को लक्षित करते हुए सांप्रदायिक बयानबाजी की है। हालांकि राज्य सरकार ने और समय की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि जवाब अगली तारीख तक अनिवार्य रूप से दाखिल किया जाए और इसकी एक प्रति पहले ही याचिकाकर्ताओं के वकील को उपलब्ध कराई जाए। सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और आर्थिक बहिष्कार के आह्वान से जुड़े इस गंभीर मामले की अगली सुनवाई 28 मई, 2026 को तय की गई है।

यह कानूनी विवाद फरवरी 2026 में दायर तीन अलग-अलग जनहित याचिकाओं से शुरू हुआ था। इनमें से एक प्रमुख याचिका साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता साहित्यकार हिरेन गोहेन, पूर्व डीजीपी हरेकृष्ण डेका और वरिष्ठ पत्रकार परेश मालाकार द्वारा दायर की गई थी। इसके अलावा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और CPI(M) ने भी इस संबंध में अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मुख्यमंत्री लगातार नफरत फैलाने वाले भाषणों में शामिल रहे हैं। याचिकाओं में लगाए गए मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:

  • अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना: आरोप है कि मुख्यमंत्री ने बंगाली मूल के मुसलमानों के लिए “मियां” जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।
  • हिंसा के लिए उकसाना: याचिकाकर्ताओं का दावा है कि सरमा ने ऐसे वीडियो जारी किए और भाषण दिए जो नागरिकों को कानून अपने हाथ में लेने के लिए उकसाते हैं।
  • आर्थिक बहिष्कार: PIL में उन घटनाओं का जिक्र है जहां मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय के सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार का आह्वान किया था।
  • विवादास्पद वीडियो: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट किए गए एक अब हटाए जा चुके वीडियो का भी हवाला दिया गया, जिसमें मुख्यमंत्री को कथित तौर पर एक विशेष समुदाय के सदस्यों पर राइफल से निशाना साधते दिखाया गया था।
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यह मामला तब गौहाटी हाईकोर्ट पहुंचा जब 16 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सीधे सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ताओं को अपनी शिकायतों के साथ गौहाटी हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया था और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इस मामले की सुनवाई में तेजी लाने का आग्रह किया था।

इससे पहले 26 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान, गौहाटी हाईकोर्ट ने कथित बयानों में “विभाजनकारी प्रवृत्ति” देखते हुए मुख्यमंत्री सरमा, केंद्र सरकार, राज्य सरकार और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किया था।

मंगलवार की सुनवाई के दौरान राज्य के प्रतिनिधि ने खंडपीठ को आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई से पहले जवाब दाखिल कर दिया जाएगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने तर्क दिया कि मुख्यमंत्री के बयान उनके संवैधानिक पद की शपथ का उल्लंघन करते हैं और धर्म व भाषा के आधार पर एक समुदाय को निशाना बनाकर “अदंडता का माहौल” पैदा कर रहे हैं।

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याचिकाकर्ताओं ने इन आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) के गठन की भी मांग की है।

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