पत्रकार महेश लांगा को सुप्रीम कोर्ट से राहत: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अंतरिम जमानत बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में पत्रकार महेश लांगा को बड़ी राहत देते हुए उनकी अंतरिम जमानत बरकरार रखी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अहमदाबाद में दर्ज वित्तीय धोखाधड़ी और आपराधिक हेराफेरी से जुड़े इस मामले में शीर्ष अदालत ने पहले दिए गए अपने जमानत आदेश की पुष्टि कर दी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की समीक्षा के बाद यह फैसला सुनाया। गौरतलब है कि कोर्ट ने पिछले साल 15 दिसंबर को लांगा को अंतरिम जमानत दी थी और अगली सुनवाई के लिए 10 अप्रैल की तारीख तय की थी।

जमानत की पुष्टि करते हुए शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राहत लांगा के “अच्छे आचरण और व्यवहार” पर निर्भर करेगी। कोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए कई कड़ी शर्तें भी लागू की हैं।

अदालत ने एक प्रमुख समाचार पत्र में सहायक संपादक के रूप में कार्यरत लांगा को निर्देश दिया है कि वह अपने खिलाफ लंबित इस मामले के तथ्यों या आरोपों पर कोई भी लेख प्रकाशित नहीं करेंगे। इसके साथ ही, पीठ ने अहमदाबाद की विशेष अदालत को इस मामले की सुनवाई रोजाना (day-to-day) आधार पर करने का निर्देश दिया है।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, “विशेष अदालत को निर्देश दिया जाता है कि वह आरोपों पर विचार करने के लिए दैनिक आधार पर मामले की सुनवाई करे। यदि आरोप तय हो जाते हैं, तो सभी नौ गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं।”

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कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि लांगा या ED में से कोई भी पक्ष सुनवाई में देरी के लिए स्थगन (adjournment) की मांग नहीं करेगा। विशेष रूप से यह भी कहा गया कि गुजरात हाईकोर्ट में लंबित कार्यवाही का हवाला देकर निचली अदालत की सुनवाई नहीं रोकी जाएगी।

अदालत में महेश लांगा का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने रखा, जबकि प्रवर्तन निदेशालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने आरोपों की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा, “पत्रकारों द्वारा पैसे वसूलना और यह कहना कि यदि आपने भुगतान नहीं किया तो मैं आपके खिलाफ लिखूंगा, एक गंभीर अपराध है।”

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पीठ ने मेहता के इस तर्क से सहमति जताई कि जमानत आदेश में दी गई टिप्पणियों को मामले के गुण-दोष (merits) पर अंतिम टिप्पणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

महेश लांगा की कानूनी मुश्किलें अक्टूबर 2024 में शुरू हुई थीं, जब उन्हें पहली बार वस्तु एवं सेवा कर (GST) धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद, 25 फरवरी 2025 को ED ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया। यह मामला अहमदाबाद पुलिस द्वारा धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात की धाराओं के तहत दर्ज की गई दो एफआईआर (FIR) से जुड़ा है।

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इससे पहले, पिछले साल 31 जुलाई को गुजरात हाईकोर्ट ने लांगा की जमानत याचिका इस आधार पर खारिज कर दी थी कि उन्हें राहत देने से अभियोजन पक्ष के मामले पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद वह जेल से बाहर रहेंगे, बशर्ते वे अदालत द्वारा निर्धारित सभी शर्तों का पालन करें।

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