मध्य प्रदेश: अवैध रेत खनन माफिया द्वारा वन रक्षक की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट में होगी त्वरित सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में अवैध रेत उत्खनन में शामिल माफियाओं द्वारा एक 35 वर्षीय वन रक्षक को ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर मारने की घटना पर संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इस “गंभीर” घटना पर चिंता जताते हुए आवेदन पर अगले सप्ताह सुनवाई करने के लिए सहमति दे दी है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच इस मामले की सुनवाई 13 अप्रैल को करेगी। यह आवेदन ‘नेशनल चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और लुप्तप्राय जलीय जीवों को खतरा’ शीर्षक वाले एक स्वतः संज्ञान (suo motu) मामले में न्याय मित्र (amicus curiae) द्वारा दायर किया गया है।

यह हृदयविदारक घटना बुधवार सुबह मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में घटित हुई। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, गश्ती दल का हिस्सा रहे वन रक्षक हरकेश गुर्जर ने नेशनल हाईवे-552 पर रानीपुर गांव के पास रेत से लदी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने का प्रयास किया था।

अवैध खनन में संलिप्त चालक ने वाहन रोकने के बजाय गुर्जर पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। न्याय मित्र के वकील ने बेंच को बताया कि यह आवेदन विशेष रूप से इस “अत्यंत गंभीर घटना” से अदालत को अवगत कराने के लिए दायर किया गया है।

जब यह मामला बेंच के समक्ष उल्लेखित किया गया, तो जस्टिस ने टिप्पणी की कि ऐसी घटनाएं अब अपवाद नहीं रह गई हैं। बेंच ने कहा, “ऐसी कुछ और भी घटनाएं हुई हैं। आपको ऐसी कई गंभीर घटनाएं देखने को मिलेंगी।” इसी गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने सुनवाई की तारीख 11 मई से घटाकर 13 अप्रैल कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट 13 मार्च से ही चंबल नदी के किनारे हो रहे अवैध खनन पर नजर रख रहा है। इससे पहले 2 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने अवैध खनन को “बढ़ावा देने” के लिए राजस्थान सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी और खनन माफियाओं की तुलना “डकैतों” से की थी। कोर्ट ने तब भी चिंता जताई थी कि इस माफिया द्वारा कई सरकारी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की जान ली जा चुकी है।

चंबल अभयारण्य राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर स्थित 5,400 वर्ग किलोमीटर का एक महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्र है। यह कई दुर्लभ प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है, जिनमें शामिल हैं:

  • घड़ियाल (लम्बे थूथन वाला मगरमच्छ)
  • गंगा डॉल्फिन
  • लाल मुकुट वाला कछुआ (Red-crowned roof turtle)
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पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि रेत के अनियंत्रित खनन से इन जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास पूरी तरह नष्ट हो रहे हैं।

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