पिकलबॉल विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से पूछा- 138 दिन पुराने संगठन को मान्यता देने में ‘मनमानी’ क्यों?

दिल्ली हाईकोर्ट ने इंडियन पिकलबॉल एसोसिएशन (IPA) को खेल के राष्ट्रीय महासंघ के रूप में मान्यता देने के केंद्र सरकार के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सवाल किया है कि एक दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले संगठन के बजाय महज 138 दिन पहले बनी संस्था को प्राथमिकता किस आधार पर दी गई।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने ऑल इंडिया पिकलबॉल एसोसिएशन (AIPA) की अपील पर केंद्रीय खेल मंत्रालय और IPA को नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस निर्णय से जुड़े सभी रिकॉर्ड 8 मई को होने वाली अगली सुनवाई तक पेश करे।

कानूनी लड़ाई इस बात पर केंद्रित है कि नवंबर 2024 में गठित हुई संस्था IPA को महज कुछ ही महीनों के भीतर 25 अप्रैल, 2025 को राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) के रूप में आधिकारिक मान्यता कैसे मिल गई। इस मान्यता के मिलने से IPA को देश भर में खेल को नियंत्रित करने की स्वायत्तता और सरकारी वित्तीय अनुदान प्राप्त करने का अधिकार मिल गया है।

अपीलकर्ता AIPA, जो 2008 से भारत में पिकलबॉल को बढ़ावा देने का दावा करती है, ने सिंगल जज के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें मंत्रालय के फैसले को सही ठहराया गया था। AIPA का आरोप है कि खेल मंत्रालय ने अनिवार्य शर्तों में भारी छूट देकर ‘स्पोर्ट्स कोड’ का उल्लंघन किया है।

सुनवाई के दौरान पीठ ने मंत्रालय की चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने गौर किया कि AIPA वर्षों से सक्रिय थी और उसका आवेदन अक्टूबर 2024 में ही जमा हो चुका था, लेकिन मंत्रालय ने उसे दरकिनार कर नई संस्था IPA को चुन लिया।

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पीठ ने केंद्र के वकील से पूछा, “दो आवेदन थे। एक आवश्यकताओं को पूरा करता है, दूसरा नहीं… आपने छूट देकर दूसरे आवेदन पर विचार कैसे किया? यह मनमानी नहीं तो क्या है?”

कोर्ट ने यह भी स्पष्टीकरण मांगा कि क्या मंत्रालय ने कभी AIPA को उसके आवेदन के खारिज होने की औपचारिक सूचना दी। पीठ ने पूछा, “क्या आपने उन्हें कभी सूचित किया कि आपकी मान्यता का अनुरोध इसलिए खारिज कर दिया गया क्योंकि आप आवश्यकताएं पूरी नहीं करते? वह सूचना कहां है?”

AIPA के वरिष्ठ वकील ने तर्क दिया कि खेल मंत्रालय ने IPA को दो महत्वपूर्ण मानदंडों से गलत तरीके से छूट दी:

  1. पूर्व अस्तित्व: आवेदन के समय कम से कम तीन साल से अस्तित्व में रहने की शर्त।
  2. जिला संबद्धता: राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की इकाइयों के साथ 50 प्रतिशत जिला इकाइयों की संबद्धता की अनिवार्यता।
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हालांकि सिंगल जज ने पहले यह माना था कि स्पोर्ट्स कोड “गैर-सांविधिक” है और उभरते खेलों के मामले में लचीलापन संभव है, लेकिन खंडपीठ ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर चिंता व्यक्त की है। हाईकोर्ट ने न्यू इंडियन पिकलबॉल एसोसिएशन की अपील पर भी नोटिस जारी किया है।

एक अंतरिम निर्देश में हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि यदि मंत्रालय मामले के लंबित रहने के दौरान IPA की मान्यता के नवीनीकरण पर विचार करता है, तो उसे AIPA और न्यू इंडियन पिकलबॉल एसोसिएशन को लिखित सबमिशन और व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देना होगा।

केंद्र के वकील ने दलील दी कि किसी भी खेल के लिए केवल एक ही इकाई को राष्ट्रीय महासंघ के रूप में मान्यता दी जा सकती है, जिसके आधार पर IPA का चयन किया गया। हालांकि, कोर्ट ने अब पूरी चयन प्रक्रिया की फाइल मांगी है ताकि यह जांचा जा सके कि क्या प्रक्रिया निष्पक्ष थी।

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