छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर के सिरगिट्टी स्थित वार्ड क्रमांक 12 (बन्नक मोहल्ला) में अधूरी नाली और क्षतिग्रस्त पेयजल पाइपलाइन के कारण उत्पन्न बदतर हालातों पर स्वतः संज्ञान (Suo Moto) लिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने छुट्टी के दिन मामले की सुनवाई करते हुए बिलासपुर नगर निगम कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वे एक सप्ताह के भीतर नाली निर्माण पूरा करें और निवासियों को तत्काल स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति बहाल करें।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 4 अप्रैल, 2026 को हिंदी दैनिक ‘नवभारत’ में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर जनहित याचिका (WPPIL No. 17 of 2026) के रूप में शुरू हुआ। रिपोर्ट का शीर्षक था— “बजबजाती नाली के बीच पानी भरने की मजबूरी, बीमारियों का खतरा”।
रिपोर्ट के अनुसार, लगभग डेढ़ महीने पहले अजय यादव के आवास से दत्तू मिश्रा के घर तक नाली निर्माण के लिए खुदाई की गई थी। इस दौरान करीब 10 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया, जिसे बाद में लावारिस छोड़ दिया गया। खुदाई के दौरान वहां से गुजरने वाली पेयजल पाइपलाइन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे पूरे मोहल्ले की जलापूर्ति ठप हो गई।
हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
हाईकोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नगर निगम के अधिकारी “स्थिति से पूरी तरह अवगत होने के बावजूद जानबूझकर इस मुद्दे की अनदेखी कर रहे हैं।” कोर्ट ने पाया कि घरों का गंदा पानी खुले गड्ढे में जमा हो रहा है, जिससे स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा:
“निवासी अपनी जान जोखिम में डालकर पीने का पानी लाने को मजबूर हैं, क्योंकि उन्हें गंदे और ठहरे हुए पानी के बीच से गुजरना पड़ता है। रुके हुए पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे डेंगू और अन्य जलजनित बीमारियों का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।”
खंडपीठ ने इस पूरी स्थिति को ठेकेदार और नगर निगम अधिकारियों की “घोर लापरवाही, कर्तव्य में चूक और जवाबदेही की कमी” का परिणाम बताया।
कोर्ट का निर्णय और निर्देश
निवासियों को “दयनीय और खतरनाक परिस्थितियों” में रहने के लिए मजबूर किए जाने पर नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने नगर निगम कमिश्नर (प्रतिवादी क्रमांक 5) को निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:
- समय सीमा में निर्माण: सिरगिट्टी के वार्ड क्रमांक 12 में नाली का निर्माण इस आदेश की तारीख से एक सप्ताह के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए।
- जलापूर्ति की बहाली: क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की तत्काल मरम्मत की जाए ताकि निवासियों को बिना किसी बाधा के शुद्ध पेयजल मिल सके।
- सफाई और सैनिटाइजेशन: जमा हुए गंदे पानी को तुरंत साफ करने और बीमारियों को रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्र में सैनिटाइजेशन के उपाय किए जाएं।
- जवाबदेही तय करना: इस चूक के लिए जिम्मेदार ठेकेदार और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और उनके खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई शुरू की जाए।
- व्यक्तिगत शपथ पत्र: कमिश्नर को अगली सुनवाई से पहले एक व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करना होगा, जिसमें कार्य की वर्तमान स्थिति, एनआईटी (NIT) की तारीख और वर्क ऑर्डर में निर्माण के लिए दी गई मूल समय सीमा का विवरण देना होगा।
कोर्ट ने अपनी उम्मीद जाहिर करते हुए कहा:
“हमें विश्वास है कि प्रश्नगत नाली का निर्माण एक सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा… ताकि स्थानीय निवासियों को किसी भी प्रकार के दूषित पानी का उपयोग न करना पड़े और बीमारियों की आशंका को खत्म किया जा सके।”
मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल, 2026 को होगी, जिसमें नगर निगम कमिश्नर को अपना जवाब पेश करना है।

