एक गलत अक्षर की सजा नहीं भुगतेगा आवदेक: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द किया बीपीसीएल का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत एक मामूली टाइपोग्राफिकल त्रुटि (लिखने की गलती) के आधार पर पेट्रोल पंप की डीलरशिप रद्द कर दी गई थी। कोर्ट ने इस कार्रवाई को “अनुचित” और “कानूनी रूप से अस्थिर” बताते हुए कहा कि सड़क के वर्गीकरण में केवल एक अक्षर की गलती उस व्यक्ति का अधिकार नहीं छीन सकती, जिसने परियोजना में अपनी मेहनत और जमापूंजी निवेश की है।

विवाद की शुरुआत 2020 में हुई जब बीपीसीएल ने उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में पेट्रोल पंप स्थापित करने के लिए राघवेंद्र अवस्थी को लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) जारी किया था। इसके बाद, अवस्थी ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कीं और डीलरशिप को चालू करने के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय संसाधन भी निवेश किए।

हालांकि, 29 जनवरी 2022 को बीपीसीएल ने अचानक इस आवंटन को रद्द कर दिया। कंपनी ने तर्क दिया कि विज्ञापन में एक त्रुटि थी, जिसमें प्रस्तावित स्थल के पास की सड़क को ‘मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड’ (MDR) बताया गया था, जबकि वास्तव में वह ‘अदर डिस्ट्रिक्ट रोड’ (ODR) थी।

जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने इस बात की समीक्षा की कि क्या एक लिपिकीय त्रुटि आवंटन रद्द करने का पर्याप्त आधार हो सकती है।

कोर्ट ने पाया कि यह गलती पूरी तरह से “टाइपोग्राफिकल” थी और इससे पेट्रोल पंप के स्थान को लेकर कोई वास्तविक भ्रम पैदा नहीं हुआ। पीठ ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इस मामूली गलती की वजह से न तो किसी अन्य संभावित आवेदक का अवसर छीना गया और न ही इसमें कोई बड़ा जनहित शामिल था।

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खंडपीठ ने “उचित अपेक्षा” (Legitimate Expectation) के सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि अवस्थी ने बीपीसीएल द्वारा दिए गए आश्वासन के आधार पर कदम उठाए थे। कोर्ट ने कहा:

“विज्ञापन में केवल एक लिपिकीय त्रुटि के आधार पर रद्दीकरण ‘अनुचित’ और कानून के विपरीत था। अवस्थी ने बीपीसीएल के आश्वासन पर भरोसा किया और वित्तीय निवेश किया, जिससे यह ‘उचित अपेक्षा’ पैदा हुई कि आवंटन का सम्मान किया जाएगा।”

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जजों ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी उम्मीदों को तकनीकी आधार पर मनमाने ढंग से खत्म नहीं किया जा सकता।

29 जनवरी 2022 के रद्दीकरण आदेश को खारिज करते हुए, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीपीसीएल को राघवेंद्र अवस्थी को जारी किए गए लेटर ऑफ इंटेंट को तुरंत बहाल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कंपनी को बिना किसी देरी के आवंटन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आदेश दिया है, ताकि याचिकाकर्ता पेट्रोल पंप की स्थापना को अंतिम रूप दे सके।

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