सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के चर्चित बहु-करोड़ रुपये के ‘ग्रैंड वेनिस मॉल’ घोटाले के आरोपी कारोबारी सतिंदर सिंह भसीन को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने भसीन को दी गई जमानत रद्द करते हुए उन्हें एक सप्ताह के भीतर जेल अधिकारियों के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ ने पाया कि भसीन ने 6 नवंबर, 2019 को जारी जमानत आदेश में निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया है। इसी के आधार पर अदालत ने भसीन द्वारा जमानत के तौर पर जमा की गई ₹50 करोड़ की राशि और उस पर अर्जित ब्याज को भी जब्त करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जमानत की शर्तों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पीठ ने कहा, “याचिकाकर्ता ने 6 नवंबर, 2019 के आदेश द्वारा उन पर लगाई गई जमानत की शर्तों का पालन नहीं किया है। परिणामस्वरूप, याचिकाकर्ता को दी गई जमानत रद्द की जाती है। याचिकाकर्ता इस निर्णय की तारीख से एक सप्ताह के भीतर सरेंडर करें।”
जब्त की गई ₹50 करोड़ की राशि के वितरण के लिए कोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश दिए:
- ₹5 करोड़ (आनुपातिक ब्याज सहित): राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) को उनके उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हस्तांतरित किए जाएंगे।
- शेष राशि (आनुपातिक ब्याज सहित): दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) की कार्यवाही के लिए अंतरिम समाधान पेशेवर (IRP) को भेजी जाएगी।
अदालत ने भसीन की विदेश यात्रा पर भी रोक बरकरार रखी है और कहा है कि ट्रायल कोर्ट इस अदालत की अनुमति के बिना याचिकाकर्ता का पासपोर्ट जारी न करे।
भसीन इंफोटेक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सतिंदर सिंह भसीन पर ग्रेटर नोएडा में ‘ग्रैंड वेनिस मॉल’ परियोजना के नाम पर निवेशकों से धोखाधड़ी करने का आरोप है। इस मामले में दिल्ली और उत्तर प्रदेश में लगभग 46 एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं।
निवेशकों और आवंटियों का आरोप है कि:
- उन्हें आवंटित की गई यूनिट्स का कब्जा नहीं दिया गया।
- निवेशकों के धन की हेराफेरी (सiphoning) की गई।
- सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से जमीन आवंटन में अनियमितताएं बरती गईं।
हालांकि भसीन को 2019 में विभिन्न शर्तों के साथ जमानत मिली थी, लेकिन शर्तों की अनदेखी के कारण अब उन्हें वापस जेल जाना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने भसीन के लिए भविष्य में जमानत का एक विकल्प खुला रखा है। पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता 12 महीने की अवधि बीतने के बाद फिर से नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकता है। हालांकि, यह इस शर्त पर निर्भर करेगा कि वह अपनी कंपनियों के खिलाफ चल रही दिवाला (Insolvency) कार्यवाही में कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन करता है।
सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित ट्रायल कोर्ट के माध्यम से जब्त की गई राशि के तत्काल वितरण को सुनिश्चित करें।

