पश्चिम बंगाल मतदाता सूची संशोधन: सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी और अन्य याचिकाकर्ताओं को निवारण के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित सभी याचिकाकर्ताओं को राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास जाने का निर्देश दिया है।

सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जोयमालया बागची की पीठ ने टिप्पणी की कि जहां देश के अन्य हिस्सों में SIR की प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हुई है, वहीं पश्चिम बंगाल एकमात्र ऐसा राज्य है जहां यह कवायद मुकदमों और विवादों में घिरी रही।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए अधिकांश मुद्दे प्रशासनिक प्रकृति के हैं। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि कलकत्ता हाईकोर्ट को पहले ही इस संशोधन प्रक्रिया के लॉजिस्टिक पहलुओं की निगरानी का जिम्मा सौंपा जा चुका है।

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अन्य राज्यों से तुलना करते हुए सीजेआई ने कहा, “अब (अन्य राज्यों में) शायद ही कोई मुकदमेबाजी बची है। मुझे लगता है कि कुछ ऐसे राज्य भी हैं जहां SIR के बाद नाम हटाए जाने की दर (West Bengal से) अधिक है।” उन्होंने आगे कहा कि इन मुद्दों को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जा सकता है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने संशोधन प्रक्रिया की सख्त समय सीमा पर चिंता जताई। उन्होंने कोर्ट के 10 मार्च के आदेश का हवाला दिया, जिसमें दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए एक रूपरेखा तैयार की गई थी।

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दीवान ने उन उम्मीदवारों के लिए संभावित संकट की ओर इशारा किया जिनके नाम वर्तमान में निर्णय प्रक्रिया (adjudication) के अधीन हैं। उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि मतदान से सात दिन पहले मतदाता सूची को फ्रीज करना अनिवार्य है, ऐसे में यदि निर्णय में देरी होती है, तो कई उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के भीतर नामांकन दाखिल करने से वंचित रह सकते हैं।

एक अन्य प्रस्तुति में, वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि मतदाताओं की पूर्ण पूरक सूची (supplementary list) अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। उन्होंने सुझाव दिया कि राजनीतिक दलों को इसकी सॉफ्ट कॉपी दी जानी चाहिए ताकि वे इसकी उचित जांच कर सकें और पारदर्शिता बनी रहे।

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पारदर्शिता से जुड़ी चिंताओं पर चुनाव आयोग (EC) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि चुनाव आयोग सभी हितधारकों को सूचित रखने के लिए दैनिक आधार पर पूरक सूचियां प्रकाशित करने को तैयार है।

सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची को फ्रीज करने की समय सीमा बढ़ाने की मांग पर भी गौर किया और संकेत दिया कि भविष्य में इस पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल, प्रक्रियात्मक विवादों के समाधान के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट ही प्राथमिक मंच होगा।

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