इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश: एटा में मिली प्राचीन जैन प्रतिमा प्रयागराज संग्रहालय में रखी जाएगी, विशेषज्ञ टीम करेगी जांच

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एटा में निर्माण कार्य के दौरान मिली एक प्राचीन जैन प्रतिमा को सुरक्षित संरक्षण के लिए प्रयागराज स्थित इलाहाबाद संग्रहालय में रखने का निर्देश दिया है। साथ ही, अदालत ने इसके ऐतिहासिक काल और संप्रदाय से जुड़े प्रश्नों पर विशेषज्ञ जांच कराने का आदेश भी दिया है।

यह प्रतिमा 22 जून को एटा में ओवरहेड वाटर टैंक के निर्माण के दौरान मिली थी। प्रारंभिक रूप से इसे 9वीं या 10वीं शताब्दी का माना जा रहा है। प्रतिमा मिलने के बाद से ही जैन समुदाय के दिगंबर और श्वेतांबर दोनों संप्रदायों ने इस पर दावा जताया है।

न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने 17 मार्च को पारित आदेश में जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि प्रतिमा को पूरी सुरक्षा के साथ प्रयागराज स्थित केंद्रीय संग्रहालय तक पहुंचाया जाए। अदालत ने कहा कि प्रतिमा के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

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अदालत ने अपने आदेश में कहा, “प्रतिमा के ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए, हम प्रारंभिक तौर पर इसके सुरक्षित संरक्षण के लिए इसे प्रयागराज स्थित केंद्रीय संग्रहालय में रखने का निर्देश देते हैं,” और जिला मजिस्ट्रेट, एटा को निर्देश दिया कि प्रतिमा को सुरक्षित रूप से 11 अप्रैल तक संग्रहालय में जमा कराया जाए।

साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संग्रहालय में रखने के बाद इस प्रतिमा को आम जनता के दर्शन के लिए प्रदर्शित किया जाएगा।

प्रतिमा की वास्तविक प्रकृति, काल और संप्रदायिक पहचान तय करने के लिए कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के सहयोग से विशेषज्ञों की एक टीम गठित करने का निर्देश दिया है। यह टीम विस्तृत अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।

हाईकोर्ट ने विशेषज्ञ समिति को यह भी कहा है कि प्रतिमा संग्रहालय में जमा होने के तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

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