KIIFB मसाला बॉन्ड मामला: केरल हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ ED की कार्रवाई पर रोक बढ़ाई

केरल हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, पूर्व वित्त मंत्री थॉमस इसाक और KIIFB के सीईओ के.एम. अब्राहम के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस पर अंतरिम रोक 6 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दी है। यह मामला केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) द्वारा मसाला बॉन्ड जारी करने में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के कथित उल्लंघन से जुड़ा है।

न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने एक हालिया सुनवाई के दौरान राहत की अवधि बढ़ाते हुए निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक ED के नोटिस के अनुपालन में कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। इससे पहले 18 दिसंबर 2025 को अदालत ने इन कार्यवाहियों पर तीन महीने की रोक लगाई थी।

इस कानूनी लड़ाई का मुख्य केंद्र ED का वह आरोप है जिसमें कहा गया है कि KIIFB ने मसाला बॉन्ड के जरिए जुटाए गए धन का उपयोग “रियल एस्टेट गतिविधियों” के लिए किया। FEMA और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार इस धन का उपयोग रियल एस्टेट में करना प्रतिबंधित है।

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पिछले साल नवंबर में, ED ने लगभग 467 करोड़ रुपये (466.91 करोड़ रुपये) के कथित उल्लंघन के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया था। केंद्रीय एजेंसी का तर्क है कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करना “रियल एस्टेट गतिविधि” की श्रेणी में आता है, इसलिए इसके लिए मसाला बॉन्ड के धन का उपयोग नहीं किया जा सकता।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री विजयन, थॉमस इसाक और के.एम. अब्राहम ने इन नोटिसों को रद्द करने के लिए एक संयुक्त याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि KIIFB राज्य में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण के लिए प्राथमिक एजेंसी है और उसने पूरी तरह से कानूनी ढांचे के भीतर काम किया है।

16 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उल्लेख किया कि RBI का एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (ECB) फ्रेमवर्क, जो जनवरी 2019 से लागू है, स्पष्ट रूप से बुनियादी ढांचा क्षेत्र (Infrastructure Sector) से संबंधित गतिविधियों को “रियल एस्टेट गतिविधि” की परिभाषा से बाहर रखता है। अदालत का यह अवलोकन ED के अधिकार क्षेत्र और नियमों की व्याख्या को चुनौती देने में याचिकाकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु साबित हुआ है।

KIIFB को केरल में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 50,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य दिया गया है। 2019 में, इसने अपने पहले मसाला बॉन्ड इश्यू के माध्यम से 2,150 करोड़ रुपये जुटाए थे। ED की जांच का केंद्र इस कोष का वह हिस्सा है (467 करोड़ रुपये) जिसका उपयोग भूमि अधिग्रहण के लिए किया गया था।

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हाईकोर्ट द्वारा रोक बढ़ाए जाने के बाद, अब राज्य सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसी 6 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई में अपनी विस्तृत दलीलें पेश करेंगे।

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