ट्रायल में देरी और लंबी हिरासत का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट ने शबीर अहमद शाह को दी जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीरी अलगाववादी नेता शबीर अहमद शाह को टेरर फंडिंग मामले में जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि ट्रायल के जल्द पूरा होने की संभावना कम है और लंबी अवधि तक हिरासत में रखना उनके व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को प्रभावित कर सकता है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने 12 मार्च के आदेश में कहा कि 74 वर्षीय शाह काफी समय से जेल में हैं और मामले की सुनवाई में खास प्रगति नहीं हुई है। ऐसे हालात में लंबे समय तक हिरासत को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शाह को 4 जून 2019 को गिरफ्तार किया था। अदालत ने इस तथ्य पर जोर दिया कि जब मुकदमे में ठोस प्रगति नहीं होती और आरोपी लंबे समय से जेल में है, तो यह जमानत पर विचार करते समय महत्वपूर्ण पहलू बन जाता है।

पीठ ने स्पष्ट किया कि वह मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है, लेकिन आरोपी की उम्र, लंबी हिरासत और ट्रायल में देरी को देखते हुए जमानत देना उचित है।

हालांकि, अदालत ने जमानत के साथ कई कड़े शर्तें भी लगाई हैं। शाह को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी, उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और केवल एक मोबाइल या लैंडलाइन नंबर का उपयोग करना होगा, जिसकी जानकारी जांच एजेंसी को देनी होगी। फोन हमेशा चालू रखना अनिवार्य होगा।

READ ALSO  कलकत्ता हाईकोर्ट के लाइव-स्ट्रीम के दौरान अचानक चलने लगी अश्लील सामग्री

इसके अलावा, उन्हें हर पंद्रह दिन में जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होना होगा और किसी भी प्रकार से सबूतों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने से बचना होगा। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि वे इस मामले से जुड़े किसी भी मुद्दे पर मीडिया में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया जाता है, तो अभियोजन पक्ष जमानत रद्द करने की मांग कर सकता है।

इस मामले में शाह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस ने पैरवी की, जबकि NIA की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान अदालत ने ट्रायल में कुछ खामियों और लंबे समय से चल रही हिरासत पर भी चिंता जताई।

इससे पहले, 4 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने से इनकार करते हुए NIA से जवाब मांगा था। यह याचिका दिल्ली हाई कोर्ट के 12 जून 2025 के आदेश को चुनौती देती थी, जिसमें शाह को जमानत देने से इनकार किया गया था। हाई कोर्ट ने आशंका जताई थी कि रिहाई के बाद वे समान गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं या गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट में 22 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित: अधिसूचना डाउनलोड करें

यह मामला 2017 में दर्ज हुआ था, जब NIA ने 12 लोगों के खिलाफ साजिश का केस दर्ज किया था। आरोप था कि ये लोग पत्थरबाजी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और केंद्र सरकार के खिलाफ गतिविधियों के लिए फंड जुटा रहे थे।

एजेंसी के अनुसार, शबीर अहमद शाह पर अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने, जनता को उकसाने, मारे गए आतंकियों को “शहीद” बताने, हवाला के जरिए धन प्राप्त करने और सीमा पार व्यापार के माध्यम से फंड जुटाने के आरोप हैं, जिनका इस्तेमाल कथित रूप से उग्रवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने में किया गया।

READ ALSO  बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्थानीय निकायों और योजना प्राधिकारियों से कहा कि दिवाली के दौरान तोड़फोड़ से बचें
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles