डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी पर सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह करेगा सुनवाई, केंद्र से स्थिति रिपोर्ट मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” साइबर ठगी के पीड़ितों से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले पर अगले सप्ताह सुनवाई करेगा। इस तरह की धोखाधड़ी में ठग खुद को पुलिस, अदालत या सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर ऑडियो-वीडियो कॉल के जरिए लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे वसूलते हैं।

मामले का उल्लेख अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष किया। उन्होंने अदालत को बताया कि इस मामले में एक स्थिति रिपोर्ट दिन के दौरान दाखिल की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस दिशा में कार्रवाई आगे बढ़ रही है और मामले को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

इस पर पीठ ने कहा कि मामले को अगले सप्ताह या यथाशीघ्र सूचीबद्ध किया जाएगा।

यह मामला डिजिटल अरेस्ट नामक तेजी से बढ़ती साइबर ठगी से जुड़ा है। इसमें अपराधी खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसियों, अदालत के अधिकारियों या सरकारी विभागों का प्रतिनिधि बताकर वीडियो या ऑडियो कॉल के जरिए पीड़ितों को धमकाते हैं। उन्हें गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है।

इससे पहले 9 फरवरी को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि डिजिटल धोखाधड़ी के जरिए 54,000 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी होना “लूट या डकैती” के समान है। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), बैंकों और दूरसंचार विभाग (DoT) जैसे हितधारकों के साथ परामर्श कर ऐसे मामलों से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SoP) तैयार करे।

READ ALSO  दिल्ली हाई कोर्ट ने हीरो मोटोकॉर्प के पवन मुंजाल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्यवाही पर रोक लगा दी

अदालत ने यह भी कहा था कि डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों को रोकने में बैंकों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों की पहचान करने का निर्देश दिया था और दिल्ली तथा गुजरात सरकारों से कहा था कि वे इन मामलों की जांच के लिए सीबीआई को आवश्यक अनुमति दें।

इसके साथ ही अदालत ने RBI, DoT और अन्य संबंधित एजेंसियों को संयुक्त बैठक कर डिजिटल अरेस्ट के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए एक ढांचा तैयार करने को कहा था। अदालत ने टिप्पणी की थी कि ऐसे मामलों में मुआवजा देने के लिए व्यावहारिक और उदार दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने अदालत को बताया था कि RBI ने बैंकों के लिए एक SoP तैयार किया है, जिसमें साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए संदिग्ध मामलों में खातों पर अस्थायी डेबिट रोक लगाने जैसे कदम शामिल हैं।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी मामले में ऑनलाइन न्यूज चैनल के संपादक को सुरक्षा दी

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने गृह मंत्रालय को निर्देश दिया था कि वह RBI के इस SoP को औपचारिक रूप से अपनाकर पूरे देश में इसके क्रियान्वयन के लिए निर्देश जारी करे।

इससे पहले 1 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों की देशभर में एकीकृत जांच के लिए सीबीआई को निर्देश दिया था। साथ ही RBI से यह भी पूछा था कि साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खातों का पता लगाने और उन्हें फ्रीज करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा।

READ ALSO  Congress Leader Jaya Thakur Files Petition In SC Seeking Probe Against Adani In Light Of Hindenburg Report

अब अदालत अगली सुनवाई में विभिन्न एजेंसियों द्वारा दाखिल की जाने वाली स्थिति रिपोर्ट और उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगी।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles