दिल्ली हाईकोर्ट की कैंटीन पर एलपीजी संकट का साया; गैस की किल्लत के चलते मेन कोर्स बंद

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की तपिश अब देश की राजधानी की कानूनी गलियारों तक पहुँच गई है। दिल्ली हाईकोर्ट की लॉयर्स कैंटीन ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी का हवाला देते हुए अपने मेनू से ‘मेन कोर्स’ (मुख्य भोजन) को अनिश्चित काल के लिए हटा दिया है।

11 मार्च, 2026 को जारी एक नोटिस में कैंटीन प्रबंधन ने वकीलों और आगंतुकों को सूचित किया कि गैस की आपूर्ति बाधित होने के कारण अब उनके लिए भोजन तैयार करना संभव नहीं रह गया है। यह घटनाक्रम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा क्षेत्र में आई अस्थिरता का प्रभाव अब भारत की आवश्यक शहरी सेवाओं पर भी दिखने लगा है।

अनिश्चित काल के लिए सेवाएं बाधित

अदालत परिसर में जारी इस आधिकारिक सूचना में कैंटीन प्रबंधन ने भोजन की कमी पर खेद व्यक्त किया है। नोटिस में कहा गया है, “हम सम्मानपूर्वक आपको सूचित करते हैं कि वर्तमान में एलपीजी गैस सिलेंडरों की अनुपलब्धता के कारण, हम लॉयर्स कैंटीन में मुख्य भोजन (मेन कोर्स) तैयार करने और परोसने में असमर्थ हैं।”

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सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रबंधन ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह सेवाएं कब बहाल होंगी। नोटिस के अनुसार, “फिलहाल हमारे पास इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि एलपीजी की आपूर्ति कब तक सामान्य होगी। जैसे ही गैस उपलब्ध होगी, हम मुख्य भोजन की तैयारी फिर से शुरू कर देंगे।”

राष्ट्रीय स्तर पर राशनिंग और आवश्यक वस्तु अधिनियम

दिल्ली हाईकोर्ट में सामने आई यह समस्या कोई अकेली घटना नहीं है। यह केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को राशनिंग (सीमित) करने के फैसले का परिणाम है। सरकार ने नेचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर, 2026 के तहत आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 को लागू किया है।

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इस निर्देश के माध्यम से सरकार को सभी मौजूदा कमर्शियल गैस बिक्री समझौतों पर सर्वोच्च अधिकार प्राप्त हो गया है। गैस वितरण के लिए अब इन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है:

  • पाइप्ड गैस कनेक्शन वाले घर।
  • सीएनजी (CNG) पर चलने वाले वाहन।
  • घरेलू रसोई गैस (LPG) बनाने वाली इकाइयां।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते होने वाली तरल प्राकृतिक गैस (LNG) की शिपमेंट बुरी तरह प्रभावित हुई है। यह राशनिंग प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए की गई है।

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संकट में हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र

हालांकि सरकार और तेल कंपनियों का दावा है कि गैस का स्टॉक पर्याप्त है और घबराने की कोई बात नहीं है, लेकिन कमर्शियल सेक्टर पर इसका गहरा असर पड़ा है। आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार ने एलपीजी उत्पादन में 10% की वृद्धि के निर्देश भी दिए हैं।

इसके बावजूद, बेंगलुरु, चेन्नई और गुरुग्राम जैसे प्रमुख शहरों के होटल संगठनों ने कमर्शियल सिलेंडरों की भारी कमी की शिकायत की है। महाराष्ट्र और दिल्ली-एनसीआर के कई भोजनालयों ने पूर्ण बंदी से बचने के लिए ‘क्राइसिस मेनू’ (संकटकालीन मेनू) अपना लिया है।

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भोजनालयों द्वारा अपनाए जा रहे उपाय:

  • कम गैस खपत वाले व्यंजनों को प्राथमिकता देना।
  • भोजन पकाने के लिए कोयला आधारित तंदूर का उपयोग करना।
  • गैस की बचत के लिए कामकाज के घंटों में कटौती करना।

जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला स्थिर नहीं होती, दिल्ली हाईकोर्ट के वकीलों और देश के होटल व्यवसायियों को इस अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।

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