बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने जालना जिला योजना समिति के गठन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र की मंत्री पंकजा मुंडे और कई सरकारी अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और यह जांचने का संकेत दिया है कि समिति का गठन कानून के अनुरूप हुआ है या नहीं।
यह आदेश 4 मार्च को न्यायमूर्ति विभा कंकणवाड़ी और न्यायमूर्ति हितेन वेणगावकर की खंडपीठ ने स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता भाऊसाहेब गोरे द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। पंकजा मुंडे वर्तमान में जालना जिले की संरक्षक मंत्री हैं।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार द्वारा गठित जिला योजना समिति का गठन कथित रूप से कानून के प्रावधानों के विपरीत किया गया है। उनका कहना है कि समिति के इसी कथित अवैध गठन के कारण विकास कार्यों के लिए आवंटित धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुसार नहीं हो रहा है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि 22 अगस्त 2024 के एक सरकारी प्रस्ताव (GR) के तहत भाऊसाहेब गोरे को समिति में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। हालांकि, उनका कार्यकाल अब समाप्त हो चुका है और फिलहाल उनका समिति से कोई संबंध नहीं है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि हाल ही में उन्हें यह जानकारी मिली कि समिति का गठन संभवतः कानून के अनुरूप नहीं किया गया था, जिसके बाद उन्होंने इस मुद्दे को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
खंडपीठ ने कहा कि उसने 22 अगस्त 2024 के सरकारी प्रस्ताव का अवलोकन किया है। हालांकि, इस प्रारंभिक चरण में अदालत ने स्पष्ट किया कि मौजूदा समिति द्वारा अब तक लिए गए किसी निर्णय या कार्रवाई पर वह कोई टिप्पणी नहीं करेगी।
अदालत ने कहा कि आगे की सुनवाई में यह जांच की जाएगी कि समिति की संरचना संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं।
हाई कोर्ट ने इस मामले में राज्य के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव, मंडल आयुक्त, जिला कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों को भी नोटिस जारी किया है।
सभी प्रतिवादियों को 27 मार्च तक अपना जवाब दाखिल करने और उसकी अग्रिम प्रति याचिकाकर्ता पक्ष को देने का निर्देश दिया गया है।
मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

