इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि जिन संस्थानों की मान्यता निलंबित है, उन्हें अनुदान (grant-in-aid) देने के संबंध में राज्य में एक समान नीति क्यों नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने यह आदेश अज़ाज अहमद द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
याचिकाकर्ता का कहना था कि राज्य सरकार कुछ ऐसे संस्थानों को अनुदान दे रही है जिनकी मान्यता निलंबित है, जबकि अन्य समान स्थिति वाले संस्थानों को अनुदान नहीं दिया जा रहा। इसे मनमाना और भेदभावपूर्ण बताया गया।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अशोक पांडे ने अदालत को बताया कि उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के रजिस्ट्रार ने निलंबित मान्यता वाले मदरसों को अनुदान रोकने की सिफारिश की थी, लेकिन राज्य सरकार ने इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
पीठ ने इन तथ्यों पर गौर करते हुए राज्य सरकार से इस संबंध में अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा और पूछा कि इस विषय पर एक समान नीति क्यों नहीं बनाई गई है।
अदालत ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई, 30 मार्च तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

