दिल्ली हाईकोर्ट: पुलिस ढांचा तय करना अदालत का काम नहीं; हर थाने में ‘मिसिंग पर्सन सेल’ की मांग वाली PIL खारिज, 53,000 अनट्रेस्ड लोगों पर नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी के प्रत्येक थाने में लापता व्यक्तियों के मामलों के लिए अलग सेल बनाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि पुलिस का संगठनात्मक ढांचा कैसे होगा, यह तय करना अदालत का काम नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने आनंद लीगल एड फोरम ट्रस्ट की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मांगी गई राहतें “सर्वग्राही” हैं और याचिका में ऐसा कोई ठोस उदाहरण नहीं दिया गया है, जहां पुलिस ने लापता व्यक्ति के मामले में एफआईआर दर्ज करने से इनकार किया हो।

याचिका में सभी लापता मामलों में अनिवार्य एफआईआर, सीबीआई जांच और एक सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में संयुक्त टास्क फोर्स की निगरानी के लिए निकाय बनाने की मांग की गई थी।

दिल्लीहाईकोर्ट की पीठ ने कहा:

“पुलिसिंग कैसे की जानी है, यह पुलिस पर ही छोड़ना चाहिए। कितने मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं हुई, इसका डेटा कहां है? सुबह अखबार पढ़कर याचिका दाखिल मत कीजिए।”

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पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि याचिकाकर्ता किसी विशेष प्रशासनिक व्यवस्था की मांग कर रहा है, अदालत रिट जारी नहीं कर सकती।

“यह अदालत का काम नहीं है कि पुलिस का संगठन कैसे चले, इस पर निर्देश दे। दिल्ली के हर थाने में लापता व्यक्तियों के लिए अलग सेल बनाना पुलिस प्रशासन का विषय है।”

अदालत ने कहा कि याचिका मुख्यतः मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है और इसमें एफआईआर दर्ज न होने के ठोस उदाहरण नहीं दिए गए हैं। सरकारी पक्ष ने भी लापता मामलों में “खतरनाक वृद्धि” के दावे को सही नहीं बताया।

इसी मुद्दे से संबंधित एक अन्य जनहित याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है।

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जयिता देब सरकार की याचिका में मांग की गई है कि:

  • कुल अनट्रेस्ड व्यक्तियों की स्थिति बताई जाए,
  • पिछले दस वर्षों में लगभग 53,000 अनट्रेस्ड लोगों को ट्रेस करने की स्थिति रिपोर्ट दाखिल की जाए, और
  • लापता मामलों से निपटने के लिए व्यापक संस्थागत तंत्र बनाया जाए।

पीठ ने चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले को अप्रैल में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

याचिका में कहा गया है कि लापता व्यक्तियों के मामलों में ट्रेस होने का अधिकार और जांच का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अभिन्न हिस्सा हैं।

याचिका में यह भी दावा किया गया कि जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में 807 लोग लापता हुए, जिनमें लगभग दो-तिहाई महिलाएं और लड़कियां थीं, और दिल्ली लापता व्यक्तियों के लिए “ट्रांजिट हब” बनती जा रही है।

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दिल्ली हाईकोर्ट इस याचिका पर प्राधिकरणों के जवाब के बाद आगे सुनवाई करेगा।

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