दिल्ली हाईकोर्ट: महिला आयोग में रिक्त पद न भरने का कोई औचित्य नहीं; सरकार से जवाब तलब

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि दिल्ली सरकार के पास दिल्ली महिला आयोग (DCW) के अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों को न भरने या आयोग को पर्याप्त स्टाफ न देने का कोई कारण नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि आयोग महिलाओं के कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण वैधानिक कार्य करता है।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने दिल्ली सरकार के वकील को निर्देश दिया कि वह यह बताएं कि रिक्त पदों को भरने और आयोग को बंद होने से बचाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। मामले को अगले बुधवार के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

पीठ ने दिल्ली महिला आयोग अधिनियम, 1994 की धारा 10 का हवाला देते हुए कहा कि आयोग को महिलाओं के संरक्षण और कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे गए हैं।

“अध्यक्ष और सदस्यों के पद रिक्त रखने तथा पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध न कराने का कोई भी कारण नहीं हो सकता।”

अदालत ने सरकार से पूछा कि इन पदों पर नियुक्ति के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई है और आयोग के कामकाज को सुचारु रखने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

READ ALSO  आतंकी फंडिंग केस में शब्बीर शाह की 6 साल से अधिक की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, NIA से मांगा जवाब

यह आदेश बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर आया, जिसमें आयोग के रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने का निर्देश देने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सत्याम सिंह ने कहा कि सदस्यों और स्टाफ के अभाव में 24 जनवरी से आयोग “बंद” स्थिति में है। याचिका में कहा गया है कि आयोग के कई वैधानिक कार्यक्रम ठप हो गए हैं।

याचिका के अनुसार प्रभावित सेवाओं में सहयोगिनी फैमिली काउंसलिंग यूनिट, हेल्पडेस्क, रेप क्राइसिस सेल, क्राइसिस इंटरवेंशन सेंटर, मोबाइल हेल्पलाइन, महिला पंचायत कार्यक्रम और महिला हेल्पलाइन 181 शामिल हैं।

याचिका में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की क्राइम इन इंडिया 2023 रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि वर्ष 2023 में दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ 13,000 से अधिक अपराध दर्ज हुए, जिनमें 1,000 से अधिक बलात्कार के मामले शामिल हैं। ऐसे में आयोग का निष्क्रिय रहना महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करता है।

READ ALSO  झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार से पूरे राज्य में अग्नि सुरक्षा ऑडिट करने को कहा

याचिका में कहा गया कि आयोग का कामकाज ठप होना संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन है, क्योंकि इससे महिलाओं को प्रभावी और सुलभ शिकायत निवारण तंत्र से वंचित किया जा रहा है।

दिल्ली सरकार के वकील ने अदालत से कहा कि वह याचिका में किए गए दावों का सत्यापन करेंगे।

अदालत ने सरकार से निर्देश प्राप्त कर अगली सुनवाई पर विस्तृत स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

READ ALSO  हिरासत से लापता राजमिस्त्री मामला: पटना हाईकोर्ट ने बिहार पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए जांच सीबीआई को सौंपी
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles