राजस्थान हाईकोर्ट का अनुशासनात्मक कदम: आकस्मिक निरीक्षण के बाद 8 न्यायिक अधिकारी APO पर

राजस्थान हाईकोर्ट ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा द्वारा जोधपुर स्थित हाईकोर्ट हेरिटेज बिल्डिंग परिसर और आसपास की अधीनस्थ अदालतों के आकस्मिक निरीक्षण के बाद आठ न्यायिक अधिकारियों को Awaiting Posting Orders (APO) पर रख दिया है।

यह कार्रवाई मंगलवार को उस समय की गई जब निरीक्षण के दौरान निर्धारित न्यायालयीन समय में कई अदालत कक्ष खाली पाए गए और कुछ न्यायिक अधिकारी अपने चैंबर में मौजूद थे, जबकि न्यायालयीन समय और चैंबर समय के लिए स्पष्ट समय-सारिणी निर्धारित है।

जिस दिन निरीक्षण हुआ उसी दिन जोधपुर के झालामंड स्थित हाईकोर्ट परिसर को ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। एहतियातन पूरे परिसर को खाली कराया गया और कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित कर दी गई। बाद में नोटिस जारी कर बताया गया कि सुनवाई दोपहर बाद शुरू होगी।

सुरक्षा जांच के बीच कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने जिला, महानगर और अन्य अधीनस्थ अदालतों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कई कोर्ट रूम खाली पाए गए और कई न्यायिक अधिकारी अपनी सीट पर उपस्थित नहीं थे।

निरीक्षण के तुरंत बाद रजिस्ट्रार जनरल ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए आठ न्यायिक अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से APO पर रखने का आदेश जारी किया। आदेश में विस्तृत कारणों का उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन समयपालन और अनुशासन में कमी को गंभीरता से लिया गया।

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APO पर रखे गए अधिकारियों में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय शर्मा को जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट में उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। शेष सात अधिकारियों को संबंधित जिला एवं सत्र न्यायाधीश के मुख्यालय में रिपोर्ट करने को कहा गया है।

APO पर रखा जाना एक प्रशासनिक व्यवस्था है, जिसके तहत संबंधित न्यायिक अधिकारी को वर्तमान न्यायिक कार्य से मुक्त कर दिया जाता है और आगे की पोस्टिंग के आदेश तक प्रतीक्षा करने को कहा जाता है। यह कदम आम तौर पर प्रशासनिक समीक्षा या आगे के निर्णय तक के लिए उठाया जाता है।

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