दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को मेजर विक्रांत जेटली की यूएई में नजरबंदी मामले में कूटनीतिक प्रयासों के लिए 3–4 सप्ताह का समय दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार और अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास को यूएई में हिरासत में रखे गए मेजर विक्रांत जेटली (सेवानिवृत्त) के मामले में कूटनीतिक माध्यमों से कार्रवाई करने और यूएई अधिकारियों का सहयोग प्राप्त करने के लिए तीन से चार सप्ताह का समय दे दिया। विक्रांत जेटली अभिनेत्री सेलिना जेटली के भाई हैं।

न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने सुनवाई स्थगित करते हुए कहा कि केंद्र द्वारा मांगा गया समय उचित है। अदालत को बताया गया कि 13 फरवरी को भारतीय दूतावास ने विक्रांत जेटली से कांसुलर मुलाकात का अनुरोध किया था, जिसे यूएई अधिकारियों ने अस्वीकार कर दिया और नई तिथि का इंतजार है।

अदालत ने कहा, “प्रार्थना उचित प्रतीत होती है। अतः सुनवाई स्थगित की जाती है।” साथ ही यह भी कहा कि मंत्रालय को ठोस प्रगति करने के लिए समय दिया जाना चाहिए।

केंद्र के वकील ने अदालत को बताया कि भारतीय दूतावास यूएई अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और कांसुलर एक्सेस, कानूनी प्रतिनिधित्व तथा अन्य आवश्यक सहयोग प्राप्त करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर प्रयास जारी हैं।

सरकार ने यह भी कहा कि विक्रांत जेटली और अदालत के बीच बातचीत की व्यवस्था कराने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही, उनकी बहन द्वारा सुझाई गई दुबई की एक लॉ फर्म को उन्हें प्रतिनिधित्व देने के मुद्दे को भी कांसुलर मुलाकात के दौरान उठाया जाएगा।

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अदालत सेलिना जेटली द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके भाई को 6 सितंबर 2024 से यूएई में “गैरकानूनी रूप से अगवा कर हिरासत में रखा गया” है और उन्हें प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व उपलब्ध नहीं कराया जा रहा।

याचिका में यह भी कहा गया कि एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद विदेश मंत्रालय उनके भाई की स्थिति और कानूनी स्थिति से संबंधित बुनियादी जानकारी हासिल नहीं कर सका है।

याचिका के अनुसार, विक्रांत जेटली वर्ष 2016 से यूएई में रह रहे थे और MATITI समूह के साथ ट्रेडिंग, कंसल्टेंसी और रिस्क मैनेजमेंट सेवाओं से जुड़े थे।

विक्रांत जेटली की पत्नी ने भी अदालत से मामले में पक्षकार बनाए जाने की मांग की ताकि वह अपनी देवरानी द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब दे सकें। उन्होंने एक नोट अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया, जिस पर अदालत ने याचिकाकर्ता को जवाब दाखिल करने की अनुमति दी।

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अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले को पारिवारिक विवाद में परिवर्तित नहीं करेगी।

मामले की अगली सुनवाई मार्च में निर्धारित की गई है। तब तक केंद्र से अपेक्षा की गई है कि वह कूटनीतिक प्रयासों की प्रगति, कांसुलर एक्सेस, कानूनी प्रतिनिधित्व और विक्रांत जेटली से संपर्क के संबंध में स्थिति स्पष्ट करे।

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