NDPS मामला: कलकत्ता हाईकोर्ट ने मेडिकल स्टोर संचालक को दी जमानत; कोडीन कफ सिरप के भंडारण पर राज्य कोई सीमा नहीं दिखा सका

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को बड़ी मात्रा में कोडीन मिश्रित कफ सिरप और ट्रामाडोल रखने के आरोप में गिरफ्तार मेडिकल स्टोर संचालक को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ऐसा कोई परिपत्र या अधिसूचना पेश नहीं कर सकी, जिसमें ऐसे कफ सिरप के भंडारण पर कोई अधिकतम सीमा तय की गई हो।

न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने कहा कि अभियोजन यह दिखाने में असफल रहा कि जब्त दवाएं औषधीय या वैज्ञानिक उपयोग के लिए नहीं थीं, जो कि NDPS अधिनियम के तहत अपराध बनाने के लिए आवश्यक तत्व है।

याचिकाकर्ता विजय प्रकाश गोयल, जो हावड़ा में लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर चलाते हैं, को अप्रैल 2025 में गिरफ्तार किया गया था। अभियोजन के अनुसार उनके पास से 158.8 लीटर कोडीन मिश्रित कफ सिरप और ट्रामाडोल मिश्रण की दो पैकेट कैप्सूल बरामद हुई थीं। तलाशी के समय वे कथित तौर पर संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।

गोयल ने जमानत याचिका दायर करते हुए कहा कि वे वैध लाइसेंसधारी व्यापारी हैं और उन्हें NDPS अधिनियम के तहत अवैध रूप से हिरासत में लिया गया।

राज्य की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि बड़ी मात्रा में कोडीन मिश्रण और ट्रामाडोल टैबलेट बरामद हुईं तथा गिरफ्तारी विधि के अनुसार की गई।

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अदालत ने कहा कि NDPS अधिनियम के प्रावधान लाइसेंसधारी व्यक्तियों पर भी लागू हो सकते हैं यदि वे लाइसेंस की आड़ में अवैध गतिविधि करें, लेकिन इसके लिए अभियोजन को अवैध खरीद, अवैध बिक्री, स्टॉक रजिस्टर में प्रविष्टि का अभाव या खातों के रखरखाव में कमी जैसे ठोस साक्ष्य दिखाने होंगे।

न्यायालय ने पाया कि राज्य केवल बरामदगी दिखा पाया है, यह नहीं कि दवाएं वैध औषधीय उपयोग के लिए नहीं थीं।

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अदालत ने विशेष रूप से कहा कि पश्चिम बंगाल में कोडीन आधारित कफ सिरप के भंडारण की कोई अधिकतम सीमा दर्शाने वाला कोई कार्यालय आदेश, अधिसूचना या परिपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया।

इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आदेश का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि वहां थोक विक्रेताओं के लिए 1000 बोतल (प्रत्येक 100 मि.ली.) और खुदरा विक्रेताओं के लिए 100 बोतल की सीमा निर्धारित है।

“राज्य पश्चिम बंगाल ऐसा कोई कार्यालय आदेश, अधिसूचना या परिपत्र प्रस्तुत नहीं कर सका, जो थोक या खुदरा विक्रेताओं को कफ सिरप या कोडीन आधारित कफ सिरप के भंडारण से रोके,” अदालत ने कहा।

अदालत ने कहा कि वैध लाइसेंसधारी के पास ऐसी दवाओं का मात्र कब्जा अपने आप NDPS अपराध नहीं बनाता, जब तक कि उन्हें अवैध उपयोग के लिए मोड़े जाने का प्रमाण न हो।

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चूंकि अभियोजन यह नहीं दिखा सका कि स्टॉक अवैध रूप से खरीदा या बेचा गया या उसका लेखा-जोखा नहीं रखा गया, इसलिए NDPS अधिनियम की कठोर धाराएं लागू करने का प्रथमदृष्टया आधार नहीं बनता।

इन कारणों से हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को जमानत प्रदान कर दी।

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