राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने सलमान खान की अपीलों की सुनवाई से खुद को अलग किया

राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बलजिंदर सिंह संधू ने सोमवार को कांकाणी काले हिरण शिकार मामले में अभिनेता सलमान खान और राज्य सरकार की अपीलों की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने मामले को जोधपुर पीठ की किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

यह मामला वर्ष 1998 का है, जब फिल्म हम साथ साथ हैं की शूटिंग के दौरान जोधपुर जिले के कांकाणी गांव में दो काले हिरणों के शिकार का आरोप लगाया गया था।

5 अप्रैल 2018 को ट्रायल कोर्ट ने सलमान खान को दोषी ठहराते हुए पाँच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। उसी निर्णय में सह-अभियुक्त सैफ अली खान, सोनाली बेंद्रे, तब्बू, नीलम और स्थानीय निवासी दुष्यंत सिंह को बरी कर दिया गया था।

सलमान खान ने अपनी सजा के खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी, जबकि राज्य सरकार ने सह-अभियुक्तों की बरी होने के खिलाफ हाईकोर्ट में ‘लीव टू अपील’ याचिका दाखिल की।

सलमान खान की ओर से बाद में हाईकोर्ट में स्थानांतरण याचिका दायर कर उनकी अपील को सत्र न्यायालय से हाईकोर्ट में मंगाकर राज्य की अपील के साथ जोड़ने का आग्रह किया गया, यह कहते हुए कि दोनों याचिकाएं एक ही मामले से संबंधित हैं।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, जुलाई 2025 में हाईकोर्ट ने सलमान खान की अपील को अपने पास स्थानांतरित करने और उसे राज्य सरकार की अपील के साथ संयुक्त रूप से सुनने का आदेश दिया था।

सोमवार को जब मामला सुनवाई के लिए जोधपुर पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुआ, तो न्यायमूर्ति संधू ने बिना मामले के गुण-दोष में गए सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया और निर्देश दिया कि अपीलों को किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।

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अब यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट की दूसरी पीठ के समक्ष आगे की सुनवाई के लिए रखा जाएगा।

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