सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेताम्बरी भट्ट को ₹30 करोड़ की ठगी और आपराधिक विश्वासघात के एक मामले में जमानत दे दी। दोनों 7 दिसंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में थे।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्य बागची की पीठ ने उदयपुर जेल से उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया और संबंधित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को शर्तों सहित जमानत आदेश पारित करने को कहा।
शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही शिकायतकर्ता अजय मुर्डिया—इंदिरा आईवीएफ एंड फर्टिलिटी सेंटर के संस्थापक और उदयपुर निवासी—तथा राजस्थान सरकार को नोटिस जारी करते हुए 19 फरवरी को जवाब मांगा है।
शिकायतकर्ता मुर्डिया ने आरोप लगाया कि विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी श्वेताम्बरी भट्ट और अन्य लोगों ने फिल्मों के निर्माण के नाम पर ₹30 करोड़ की राशि ली, लेकिन इसका दुरुपयोग किया गया।
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी बिल तैयार कर विभिन्न नामों से पैसे अपने खातों में ट्रांसफर करवाए। यह राशि फिल्मों के निर्माण के लिए दी गई थी, लेकिन कथित रूप से निजी उपयोग में खर्च कर दी गई।
राजस्थान पुलिस ने 7 दिसंबर 2025 को विक्रम भट्ट, श्वेताम्बरी भट्ट, उदयपुर निवासी दिनेश कटारिया और भट्ट के मैनेजर महबूब अंसारी को मुंबई से गिरफ्तार कर उदयपुर लाया था।
राजस्थान हाईकोर्ट ने 31 जनवरी को भट्ट दंपत्ति की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। अदालत ने कहा था कि इस चरण में जमानत देना उपयुक्त नहीं होगा।
अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दोनों की रिहाई हो सकेगी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा शर्तों के साथ जमानत आदेश जारी किया जाएगा।
मामले की आगे की सुनवाई 19 फरवरी को होगी।

