कोलकाता नगर निगम द्वारा सड़क का नाम बदलने के बाद देश के सबसे पुराने हाईकोर्ट — कलकत्ता हाईकोर्ट — को गुरुवार को एक नया आधिकारिक पता मिला। अब तक ‘एस्प्लेनेड रो (वेस्ट)’ कहलाने वाली सड़क का नाम बदलकर ‘जस्टिस राधाबिनोद पाल सरणी’ कर दिया गया है।
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अब हाईकोर्ट का नया पता होगा:
3, जस्टिस राधाबिनोद पाल सरणी, कोलकाता, पश्चिम बंगाल – 700001
150 साल पुरानी विरासत
कलकत्ता हाईकोर्ट की इमारत 1872 में बनाई गई थी, यानी अदालत की स्थापना के 10 साल बाद। इसे ब्रिटिश राज के दौरान सरकारी आर्किटेक्ट वॉल्टर ग्रैनविल ने डिज़ाइन किया था। इसकी वास्तुकला 13वीं सदी के बेल्जियम के यिपरे शहर में स्थित ‘क्लॉथ हॉल’ से प्रेरित है। यह भवन भारत की न्यायिक और औपनिवेशिक विरासत का प्रतीक रहा है और आज भी न्यायपालिका की गरिमा को दर्शाता है।
न्यायमूर्ति राधाबिनोद पाल को सम्मान
सड़क का नाम बदलना न्यायमूर्ति राधाबिनोद पाल (1886–1967) को श्रद्धांजलि देने के लिए किया गया है। वे एक प्रख्यात भारतीय न्यायविद थे, जिन्हें द्वितीय विश्व युद्ध के बाद टोक्यो में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सैन्य न्यायाधिकरण (Tokyo Trials) में उनके ऐतिहासिक असहमति वाले निर्णय के लिए जाना जाता है। उन्होंने अकेले ही 25 जापानी अभियुक्तों को दोषमुक्त ठहराते हुए यह कहा था कि न्यायाधिकरण ने पूर्वव्यापी कानूनों के आधार पर कार्य किया, जो न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
जापान में उन्हें आज भी न्याय और निष्पक्षता के प्रतीक के रूप में सम्मानित किया जाता है। अब कोलकाता की यह नई पहचान उनके योगदान को भारत की न्यायिक विरासत में औपचारिक रूप से स्थान देती है।
परंपरा और न्यायिक मूल्यों का संगम
हालांकि यह बदलाव प्रतीकात्मक है, लेकिन इसका ऐतिहासिक महत्व गहरा है। यह न केवल भारत की औपनिवेशिक विरासत और न्याय प्रणाली को जोड़ता है, बल्कि ऐसे समय में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और नैतिक साहस के प्रतीकों को भी सामने लाता है।

