सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पर्यावरणीय मंज़ूरी से जुड़े एक अहम मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत के रूप में यह ज़रूरी है कि ऐसे किसी भी निर्णय में गलती की संभावना को न्यूनतम रखा जाए, जो देश के विकास या पर्यावरण पर दूरगामी और विनाशकारी प्रभाव डाल सकती है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह भी आगाह किया कि ऐसा कोई संदेश नहीं जाना चाहिए जिससे यह लगे कि देश की न्यायिक प्रणाली में किसी तरह की अनिश्चितता या अस्थिरता है।
“हमें यह भी देखना होगा कि हमारे निर्णयों के देश पर समग्र रूप से क्या प्रभाव पड़ सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय में, हमें ऐसी किसी भी गलती की गुंजाइश को कम करना चाहिए, जिसका राष्ट्र के विकास या पर्यावरण पर दूरगामी और विनाशकारी असर हो सकता है,” — मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की।
यह टिप्पणी उन दो फैसलों के परिप्रेक्ष्य में आई, जो एक ही मुद्दे पर अलग-अलग पीठों द्वारा दिए गए थे।
- 16 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशों वाली पीठ ने पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रोजेक्ट्स को पिछली तारीख़ से पर्यावरणीय मंज़ूरी देने पर प्रतिबंध लगा दिया था।
- लेकिन 18 नवंबर 2025 को एक बड़ी, तीन-न्यायाधीशों वाली पीठ ने इस फैसले को पलटते हुए कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट्स को भारी जुर्माने के साथ मंजूरी दी जा सकती है ताकि सार्वजनिक धन से बने करीब ₹20,000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स को तोड़ने से बचाया जा सके।
गुरुवार की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि नवंबर में दिया गया निर्णय भले ही समीक्षा याचिका पर था, लेकिन उसमें मामले के गुण-दोष पर विचार किया गया था।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पीठ ने कहा:
“ऐसा कोई गलत संदेश नहीं जाना चाहिए कि अदालत कोई भी आदेश देते समय सभी पक्षों पर विचार नहीं करती। समीक्षा याचिका पर जो फैसला दिया गया, वह विस्तार से सुनवाई के बाद लिया गया है और उस दृष्टिकोण का भी सम्मान किया जाना चाहिए।”
न्यायालय ने यह भी कहा कि न्यायिक प्रणाली में पूर्वानुमेयता और स्थिरता का संदेश जाना बेहद आवश्यक है और यह आभास नहीं होना चाहिए कि अदालतें एकरूपता से काम नहीं करतीं।
सुनवाई के दौरान कुछ इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन (मध्यवर्ती अर्ज़ियाँ) का भी ज़िक्र हुआ। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि वह सोमवार को इन अर्ज़ियों के साथ मुख्य मामले की भी सुनवाई करेगी।

