सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केरल हाईकोर्ट के सात अपर जजों (Additional Judges) को स्थायी जज (Permanent Judges) के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की है। यह निर्णय आज, 12 फरवरी 2026 को आयोजित कॉलेजियम की बैठक में लिया गया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केरल हाईकोर्ट के सात मौजूदा अपर जजों को स्थायी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह सिफारिश हाईकोर्ट की स्थायी बेंच को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आज जारी अपने आधिकारिक बयान में, कॉलेजियम ने उन अपर जजों की सूची दी है जिनकी स्थायी जज के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दी गई है:
- श्री जस्टिस अब्दुल हकीम मुल्लाप्पल्ली अब्दुल अजीज
- श्री जस्टिस श्याम कुमार वडक्के मुदावक्कत
- श्री जस्टिस हरिशंकर विजयन मेनन
- श्री जस्टिस मनु श्रीधरन नायर
- श्री जस्टिस ईश्वरन सुब्रमणी
- श्री जस्टिस मनोज पुलम्बी माधवन
- श्रीमती जस्टिस मरक्कापरम्बिल भार्गवन स्नेहलता
कॉलेजियम प्रणाली, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं, उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति और स्थानांतरण की सिफारिश करने के लिए जिम्मेदार है। इन जजों की स्थायी नियुक्ति के प्रस्ताव पर 12 फरवरी 2026 को हुई बैठक में विचार किया गया और इसे मंजूरी दी गई।
इस सिफारिश के बाद, अब यह फाइल केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा संसाधित की जाएगी, जिसके बाद भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति के वारंट जारी किए जाने की उम्मीद है।
आधिकारिक बयान में कहा गया है: “सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 12 फरवरी, 2026 को हुई अपनी बैठक में केरल हाईकोर्ट में निम्नलिखित अपर जजों को स्थायी जजों के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।”

