केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को पिछले वर्ष आयोजित ग्लोबल अयप्पा संगम की ऑडिट रिपोर्ट में कई खामियों और “गंभीर असंगतियों” को लेकर त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने केरल राज्य ऑडिट विभाग और TDB से आवश्यक स्पष्टीकरण मंगवाने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 27 फरवरी तय की है।
मुख्य न्यायाधीश राजा विजय राघवन वी और न्यायमूर्ति के वी जयकुमार की पीठ ने यह टिप्पणी उस रिपोर्ट के अवलोकन के दौरान की, जिसे कोर्ट के पूर्व निर्देश के अनुसार दाखिल किया गया था। यह रिपोर्ट उन याचिकाओं की पृष्ठभूमि में मांगी गई थी, जो ग्लोबल अयप्पा संगम को चुनौती देने के लिए दाखिल की गई थीं।
कोर्ट ने ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर पाया कि संगम में वितरित की गई कई महत्त्वपूर्ण वस्तुओं—जैसे अरवणा, अप्पम, विभूति, कुमकुम और चंदन—का मूल्य लेखा पुस्तकों में दर्ज ही नहीं है। ये वस्तुएं धार्मिक रूप से मूल्यवान होने के साथ-साथ आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। इनका रिकॉर्ड न होना वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कोर्ट ने यह भी पाया कि आयोजन से संबंधित कई निर्माण व अन्य कार्य भारतीय आधारभूत संरचना एवं निर्माण संस्थान (IIIC) को सीधे सौंपे गए, जिनमें न तो टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई और न ही कोई प्रतिस्पर्धी बोली मंगाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, ये कार्य ‘व्यय प्लस 10% प्रशासनिक शुल्क’ के आधार पर दिए गए थे, जो मानक प्रक्रिया का उल्लंघन है।
कोर्ट ने रिपोर्ट में दर्ज अन्य गंभीर खामियों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि—
- लकड़ी के फ्रेम वाले सेंटर टेबल की लागत का निर्धारण अस्पष्ट है
- वीआईपी क्षेत्रों में भोजन परोसे जाने के खर्चों में पारदर्शिता नहीं
- ‘कॉस्ट प्लस’ मॉडल में भी स्पष्टता का अभाव है
कोर्ट ने यह भी कहा कि GST इनपुट क्रेडिट को लेकर भी रिपोर्ट में मुद्दे उठाए गए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर भी संबंधित अधिकारियों को स्पष्टीकरण देना होगा।
गौरतलब है कि कोर्ट ने यह याचिका ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर स्वयं संज्ञान लेते हुए शुरू की थी, ताकि संगम के आयोजन में वित्तीय प्रबंधन की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित विभागों से जवाब मिलने के बाद ही उचित आदेश पारित किया जाएगा। अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी।

