यमुना बाढ़ क्षेत्र में अवैध निर्माण का मामला: एनजीटी ने एमसीडी, डीडीए समेत अन्य से मांगा जवाब

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र में मजनू का टीला के पास एक बहुमंजिला इमारत के कथित अवैध निर्माण के मामले में एमसीडी, डीडीए समेत संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र में मजनू का टीला इलाके में कथित रूप से बन रही एक बहुमंजिला इमारत को लेकर नगर निगम और अन्य संबंधित प्राधिकरणों से जवाब मांगा है।

यह आदेश 5 फरवरी को एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने एक पत्र याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। यह याचिका वज़ीराबाद गांव निवासी द्वारा दाखिल की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि मजनू का टीला क्षेत्र में यमुना के बाढ़ क्षेत्र पर एक बहुमंजिला निर्माण कार्य चल रहा है।

पीठ ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे “पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन से जुड़े महत्वपूर्ण विषय” हैं। इस पर अधिकरण ने दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (DM) को मामले में पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया।

अधिकरण ने आदेश में कहा:

“रजिस्ट्री को निर्देशित किया जाता है कि वह उपरोक्त प्रतिवादियों को नोटिस भेजे और उन्हें शपथपत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने के लिए कहे। अपने जवाबी शपथपत्र में जिला मजिस्ट्रेट बताएंगे कि उक्त निर्माण कार्य कौन कर रहा है और क्या यह यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र में हो रहा है।”

एनजीटी का यह हस्तक्षेप दर्शाता है कि वह यमुना के पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील बाढ़ क्षेत्रों में अतिक्रमण और अवैध निर्माण को लेकर सतर्क है।

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मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।

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