झारखंड हाईकोर्ट ने पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा में कथित रूप से बच्चों को संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी की एकलपीठ ने दीपक हेम्ब्रम द्वारा दायर एक आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनकी तमाम कोशिशों के बावजूद चाईबासा के सदर थाना में इस गंभीर मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
कोर्ट ने चाईबासा सदर थाना प्रभारी को निर्देश दिया कि मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर संबंधित दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए।
इससे पहले, मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने पांच बच्चों के HIV संक्रमित पाए जाने के मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की थी। ये सभी बच्चे थैलेसीमिया के रोगी थे और उनका चाईबासा सदर अस्पताल में रक्त चढ़ाने का इलाज हुआ था।
कोर्ट को यह जानकारी दी गई थी कि संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने से ये बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए, जिस पर कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग को कड़ी फटकार लगाई।
कोर्ट ने झारखंड के स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह को निर्देश दिया कि वे एक शपथपत्र (अफिडेविट) दाखिल कर बताएं:
- राज्य में अब तक सरकारी और निजी अस्पतालों में कितने रक्तदान शिविर आयोजित हुए हैं
- क्या ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिए निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) अपनाए जा रहे हैं
- और क्या नेशनल ब्लड पॉलिसी के अनुसार नई SOP बनाई गई है या बनाई जा रही है
राज्य सरकार ने 26 अक्टूबर को पश्चिमी सिंहभूम के सिविल सर्जन समेत कुछ अन्य अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर एक उच्च स्तरीय जांच भी शुरू की गई है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी इस तरह की चूकें बेहद गंभीर हैं और राज्य को ब्लड ट्रांसफ्यूजन से संबंधित व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करना होगा। कोर्ट मामले की अगली सुनवाई में सरकार की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करेगा।

