नीट-पीजी 2025-26 की कट-ऑफ में भारी छूट पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और अन्य से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को NEET-PG 2025-26 में पात्रता कट-ऑफ को अत्यधिक घटाए जाने के खिलाफ दायर एक याचिका पर केंद्र सरकार, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBEMS), राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और अलोक अराधे की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 6 फरवरी तय की है।

NBEMS ने देशभर में 18,000 से अधिक पीजी मेडिकल सीटें खाली रह जाने के कारण पात्रता मानदंडों में बदलाव करते हुए कट-ऑफ में भारी छूट दी है। संशोधित कट-ऑफ के अनुसार:

  • सामान्य वर्ग के लिए कट-ऑफ 50 पर्सेंटाइल से घटाकर 7 पर्सेंटाइल कर दी गई है।
  • आरक्षित वर्गों के लिए कट-ऑफ को शून्य पर्सेंटाइल कर दिया गया है, जिससे -40/800 तक अंक पाने वाले अभ्यर्थी भी तीसरे चरण की काउंसलिंग में भाग ले सकेंगे।
READ ALSO  गिफ्ट टैक्स नियमों में भेदभाव के खिलाफ समलैंगिक जोड़े की बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका

इस कदम की चिकित्सकीय समुदाय के कई वर्गों ने कड़ी आलोचना की है और इसे “अभूतपूर्व” और “तर्कहीन” बताया है।

यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरीशरण देवगन, डॉ. सौरव कुमार, डॉ. लक्ष्य मित्तल और डॉ. आकाश सोनी द्वारा दाखिल की गई है, जिसमें कहा गया है कि:

  • चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद पात्रता मानदंडों में बदलाव अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन है।
  • उम्मीदवारों ने पहले से घोषित कट-ऑफ के आधार पर तैयारी की थी और करियर संबंधी निर्णय लिए थे, ऐसे में नियमों को बीच में बदलना मनमाना और असंवैधानिक है।
  • याचिका में कहा गया: “पीजी मेडिकल शिक्षा को व्यावसायिक गतिविधि की तरह नहीं लिया जा सकता। मानक कम होने से गुणवत्ता प्रभावित होगी और नियामक संस्थाओं को इसकी अनुमति नहीं देनी चाहिए।”
READ ALSO  बॉम्बे हाई कोर्ट ने अडानी पावर कॉन्ट्रैक्ट के खिलाफ याचिका खारिज की, 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया

NBEMS के इस फैसले की कड़ी आलोचना हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी न्यूनतम या नकारात्मक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को पीजी मेडिकल सीटों पर प्रवेश देना भविष्य के चिकित्सकों की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकता है।

अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से यह मामला न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ गया है, जहां यह तय होगा कि सीटें भरने की आवश्यकता और शिक्षा के उच्च मानकों को कैसे संतुलित किया जाए।

READ ALSO  उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 31 साल पुराने आपराधिक मामले में बरी का फैसला बरकरार रखा
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles