सुप्रीम कोर्ट को मंगलवार को सूचित किया गया कि कांग्रेस सांसद Vivek Tankha ने केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan के खिलाफ दायर आपराधिक और दीवानी मानहानि के मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया है और दोनों पक्षों के बीच विवाद का सौहार्दपूर्ण निपटारा हो गया है। इसके बाद अदालत ने मामले का निपटारा कर दिया।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन.के. सिंह की पीठ को वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने बताया कि संसद परिसर में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई, जिसके बाद तन्खा ने चौहान के खिलाफ दायर मानहानि की शिकायत वापस लेने का फैसला किया। तन्खा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता सुमीर सोढ़ी पेश हुए।
पीठ ने यह दर्ज किया कि तन्खा द्वारा आपराधिक तथा दीवानी—दोनों मानहानि वाद वापस लिए जाएंगे और इस आधार पर कार्यवाही समाप्त कर दी। अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के सहयोग की सराहना करते हुए यह भी कहा कि राजनेताओं द्वारा दिए गए बयानों से जुड़े मामलों में अदालतों को अत्यंत सावधानी बरतनी होती है।
तन्खा ने ट्रायल कोर्ट में दायर शिकायत में आरोप लगाया था कि मध्य प्रदेश में 2021 के पंचायत चुनावों के दौरान उनके खिलाफ मानहानिकारक बयान दिए गए। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के 17 दिसंबर 2021 के आदेश के बाद भाजपा नेताओं द्वारा यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण का विरोध किया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
अपनी याचिका में तन्खा ने ₹10 करोड़ के हर्जाने की मांग की थी और शिवराज सिंह चौहान के साथ-साथ भाजपा नेता वी.डी. शर्मा और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ आपराधिक मानहानि की कार्यवाही शुरू करने की प्रार्थना की थी। शिकायत में कहा गया था कि इन नेताओं ने राजनीतिक लाभ के लिए उनके खिलाफ “समन्वित, दुर्भावनापूर्ण, झूठा और मानहानिकारक” अभियान चलाया।
यह मामला 2024 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मानहानि कार्यवाही रद्द करने से इनकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और भाजपा नेताओं के खिलाफ जारी जमानती वारंट को सही ठहराया। इसके बाद 11 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने जमानती वारंट के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी और तन्खा से जवाब मांगा था।
इससे पहले, 25 अक्टूबर 2024 को हाई कोर्ट ने शिवराज सिंह चौहान, वी.डी. शर्मा और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ दायर मानहानि मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया था। वहीं, 20 जनवरी 2024 को जबलपुर की एक विशेष अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत मामले का संज्ञान लेते हुए तीनों नेताओं को तलब किया था।
भाजपा नेताओं की ओर से यह दलील दी गई थी कि कथित बयान विधानसभा के पटल पर दिए गए थे और संविधान के अनुच्छेद 194(2) के तहत संरक्षित हैं, जिसके अनुसार राज्य विधानमंडल के सदस्य को सदन में कही गई बातों के लिए किसी भी न्यायालय में उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा था कि तन्खा द्वारा संलग्न समाचार पत्रों की कतरनें मानहानि शिकायत का आधार नहीं बन सकतीं और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से किसी प्रकार की मानहानि का संकेत नहीं मिलता। इसके अलावा, यह तर्क भी रखा गया था कि सभी आरोपी उस समय सार्वजनिक पद पर थे और सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना ट्रायल कोर्ट द्वारा संज्ञान लेना त्रुटिपूर्ण था।
अब, दोनों पक्षों के बीच समझौता दर्ज होने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस लंबे समय से लंबित विवाद का पटाक्षेप कर दिया।

