दिल्ली दंगा मामला: कोर्ट ने छह आरोपियों को बरी किया, पुलिस पर फर्जी चार्जशीट दाखिल करने और रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का आरोप

दिल्ली की एक अदालत ने 2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के एक मामले में छह आरोपियों को बरी कर दिया है और दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में “पूरी तरह विफल” रहा और जांच में रिकॉर्ड से “जानबूझकर छेड़छाड़” की गई।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) प्रवीन सिंह ने 31 जनवरी को पारित आदेश में प्रेम प्रकाश उर्फ काके, इशु गुप्ता, राजकुमार उर्फ सिवैयाँ, अमित उर्फ अन्नू, राहुल उर्फ गोलू और हरिओम शर्मा को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

इन पर 25 फरवरी 2020 को दिल्ली दंगों के दौरान सुदामापुरी क्षेत्र में अज़ीज़िया मस्जिद के पास हुई आगजनी, लूटपाट और तोड़फोड़ की घटनाओं में शामिल होने का आरोप था। IPC की कई धाराओं के तहत इन पर मुकदमा चला, जिनमें दंगा, आगजनी, हत्या का प्रयास, चोरी और आपराधिक साजिश शामिल थीं।

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न्यायाधीश ने स्पष्ट कहा:

“मैं पाता हूं कि अभियोजन पक्ष अपने आरोप साबित करने में बुरी तरह विफल रहा है। सभी आरोपी लगाए गए सभी आरोपों से बरी किए जाते हैं।”

अदालत ने कहा कि केस गढ़े गए बयानों और अविश्वसनीय गवाहों पर आधारित था। कोर्ट ने पाया कि कई गवाहों ने शुरू में कहा था कि उन्होंने किसी दंगाई को नहीं देखा, लेकिन बाद में अपने बदले हुए बयानों में नाम लेकर आरोप लगाए।

“अभियोजन का मामला ऐसे गवाहों के आधार पर गढ़ा गया प्रतीत होता है, जिन्होंने अपनी प्रारंभिक बयानों में किसी भी दंगाई को देखने से इनकार किया था, परंतु बाद में उनके बदले हुए बयानों में नामजद आरोप लगाए गए, जो स्पष्ट रूप से छेड़छाड़ और मनगढ़ंत प्रतीत होते हैं,” अदालत ने कहा।

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अदालत ने पुलिस की जांच प्रक्रिया और पर्यवेक्षण तंत्र पर गंभीर चिंता जताई। न्यायाधीश ने कहा:

“जिस हद तक रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की गई है, वह यह दर्शाता है कि पर्यवेक्षण तंत्र पूरी तरह से विफल रहा है, क्योंकि एक मनगढ़ंत चार्जशीट पर्यवेक्षण अधिकारियों द्वारा आगे बढ़ाई गई।”

न्यायालय ने इस आदेश की एक प्रति दिल्ली पुलिस आयुक्त को भेजने का निर्देश दिया, ताकि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

अदालत ने आगे कहा:

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“यदि यह तंत्र वैसा ही कार्य करता जैसा उससे अपेक्षित है, तो अभियुक्तों के अधिकारों और समाज की उस अपेक्षा की रक्षा होती कि आपराधिक मामलों की निष्पक्ष जांच की जाती है। परंतु यहां यह तंत्र कुचला और नष्ट कर दिया गया।”

यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा था, जिनमें कई लोगों की जान गई और व्यापक क्षति हुई थी। छह आरोपियों को कथित रूप से हिंसक भीड़ का हिस्सा बताया गया था।

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