मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए 200 पेड़ों की कटाई पर लगाई रोक; तोते के प्राकृतिक आवास की रक्षा जरूरी

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शुक्रवार को इंदौर शहर में मेट्रो रेल परियोजना के लिए रानी सराय क्षेत्र के पास लगभग 200 पेड़ों की प्रस्तावित कटाई पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने यह आदेश देते हुए कहा कि ये पेड़ हजारों तोतों का प्राकृतिक आवास हैं, और इनकी कटाई से पर्यावरण और जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ेगा।

न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जो कि पीपल फॉर एनिमल्स इंदौर इकाई के अध्यक्ष प्रियंशु जैन द्वारा दायर की गई थी।

अदालत ने अपने आदेश में निर्देश दिया:

“अंतरिम व्यवस्था के रूप में निर्देशित किया जाता है कि अगली सुनवाई तक कोई भी पेड़ न तो काटा जाए और न ही स्थानांतरित किया जाए।”

मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी 2026 को होगी।

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याचिकाकर्ता ने बताया कि रानी सराय और रीगल चौराहे के निकट एक व्यस्त सड़क पर स्थित लगभग 200 पेड़ों को मेट्रो रेल ब्रिज के निर्माण के लिए काटने की योजना है। ये पेड़ पुराने और घने हैं, और हजारों तोतों का बसेरा बने हुए हैं। इनकी कटाई से इन पक्षियों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाएगा।

याचिकाकर्ता के वकील लवेश सारस्वत ने दलील दी कि यह कदम अपूरणीय पर्यावरणीय क्षति, हरित आच्छादन की हानि और पारिस्थितिक असंतुलन का कारण बनेगा। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई बिना वैधानिक प्रक्रिया और स्वीकृतियों के की जा रही है, जिनमें शामिल हैं:

  • वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980
  • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
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हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

31.32 किलोमीटर लंबी इंदौर मेट्रो परियोजना वर्ष 2019 से निर्माणाधीन है। यह शहर के यातायात तंत्र को सुदृढ़ करने का प्रयास है। हालांकि, घनी आबादी वाले और व्यावसायिक क्षेत्रों में इसका कार्य विवादों और अड़चनों का सामना कर रहा है।

इस परियोजना की प्रारंभिक लागत ₹7500 करोड़ निर्धारित की गई थी, लेकिन बदलावों के कारण लागत में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि इस परियोजना के तहत पर्यावरणीय प्रक्रियाओं की अवहेलना की गई है।

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अब अगली सुनवाई 16 फरवरी 2026 को होगी, जिसमें सभी पक्षों से जवाब दाखिल करने की अपेक्षा है। तब तक के लिए कोई भी पेड़ न काटने या स्थानांतरित न करने का निर्देश प्रभावी रहेगा।

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