दिल्ली मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने 29 वर्षीय दिलीप कुमार की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के मामले में उनके परिजनों को ₹56.33 लाख का मुआवजा प्रदान करने का आदेश दिया है। अधिकरण ने माना कि यह दुर्घटना ट्रक चालक की लापरवाही और तेज रफ्तार में अचानक ब्रेक लगाने के कारण हुई।
अध्यक्ष अधिकारी विक्रम ने 12 जनवरी 2026 को यह आदेश उस याचिका पर सुनाया, जिसे मृतक की पत्नी, दो छोटे बच्चे और वृद्ध माता-पिता ने दायर किया था। यह हादसा 15 जनवरी 2019 को नोएडा की कासगंज रोड पर बिरावर मोड़ के पास हुआ था, जब दिलीप अपने एक मित्र के साथ कार में यात्रा कर रहे थे। तभी एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार को ओवरटेक कर अचानक ब्रेक लगा दिए, जिससे कार पीछे से ट्रक में जा घुसी। दिलीप कुमार को तुरंत सिकंद्रा राव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
दलीलों के दौरान ट्रक चालक और मालिक ने दुर्घटना की घटना को स्वीकार किया। हालांकि, बीमा कंपनी HDFC ERGO जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड ने यह तर्क दिया कि दुर्घटना ट्रक चालक की गलती से नहीं, बल्कि कार चालक की लापरवाही से हुई, क्योंकि कार ट्रक से पीछे से टकराई। अधिकरण ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि जब दुर्घटना की बात खुद ट्रक चालक और मालिक ने मानी है, तो यह उनका दायित्व था कि वे दुर्घटना की परिस्थितियों का खंडन करते और साबित करते कि यह उनकी गलती नहीं थी। ऐसा न कर पाने के कारण अधिकरण ने उनके विरुद्ध प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला।
अधिकरण ने यह भी माना कि मृतक के सभी आश्रित — पत्नी, बच्चे और माता-पिता — उसकी आय पर निर्भर थे। मुआवजे की कुल राशि ₹56.33 लाख में से ₹53.55 लाख केवल ‘आय पर निर्भरता की हानि’ (Loss of Dependency) के मद में प्रदान की गई।
चूंकि दुर्घटना के समय ट्रक बीमित था और बीमा कंपनी कोई वैधानिक प्रतिरक्षा सिद्ध नहीं कर सकी, इसलिए अधिकरण ने HDFC ERGO जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड को निर्देश दिया कि वह पूरी मुआवजा राशि याचिकाकर्ताओं को प्रदान करे।

