सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सुझाव दिया कि वह सड़क निर्माण से जुड़े ठेकेदारों से कहे कि वे कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत हर 50 किलोमीटर पर एक गौशाला बनाएं ताकि हाईवे पर घूम रहे आवारा पशुओं की देखभाल हो सके।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ,न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने यह सुझाव उस समय दिया जब वह आवारा कुत्तों और मवेशियों को सड़कों और संस्थानों से हटाने के पूर्व आदेशों में बदलाव की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु की ओर से की गई अब तक की कार्रवाई पर असंतोष जताया।
पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि वह प्रतिदिन 100 आवारा कुत्तों की नसबंदी कर रही है। इस पर अदालत ने कहा, “यह प्रयास किसी काम का नहीं है। यह तो भूसे के ढेर में सुई ढूंढने जैसा है।”
न्यायमूर्ति मेहता ने चेताया कि यदि इस समस्या से अभी नहीं निपटा गया तो यह और बढ़ती जाएगी, “हर साल आवारा कुत्तों की जनसंख्या 10–15% बढ़ेगी। आप अपनी ही समस्या बढ़ा रहे हैं।”
राजस्थान की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि राज्य में नसबंदी केंद्रों की स्थापना और शैक्षणिक संस्थानों की बाड़बंदी हो चुकी है। लेकिन पीठ ने राज्य के हलफनामे में 45 पकड़ने वाली वैन होने की बात पर आपत्ति जताई।
“जयपुर शहर के लिए ही 20 वैन चाहिए। फिर बाकी शहरों का क्या होगा? वाहन और स्टाफ बढ़ाए बिना आप CSVR (पकड़ो, नसबंदी करो, टीका लगाओ, और छोड़ो) फार्मूला कैसे लागू करोगे?” न्यायमूर्ति मेहता ने पूछा।
भाटी ने जवाब दिया कि इस विषय पर राज्य ने और बजट मांगा है।
NHAI के वकील ने अदालत को बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1300 से अधिक स्थान ऐसे हैं जो आवारा मवेशियों के कारण खतरनाक हैं। अधिकतर राज्यों ने कार्रवाई की है, लेकिन महाराष्ट्र, झारखंड और राजस्थान जैसे कुछ राज्य अब भी पीछे हैं।
अदालत ने सुझाव दिया कि NHAI के ठेकेदार CSR के तहत गौशालाएं स्थापित करें ताकि इन मवेशियों की देखभाल हो सके। वकील ने इस सुझाव को सकारात्मक रूप से लेने की बात कही। अदालत ने एक मोबाइल ऐप विकसित करने की बात भी कही, जिससे नागरिक हाईवे पर आवारा जानवरों की जानकारी दे सकें।
एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि 7 नवंबर 2025 के आदेश के बाद नसबंदी केंद्र और पशु आश्रय खोलने के लिए 250 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, लेकिन उन्हें अभी तक मंजूरी नहीं दी गई है।
न्यायमूर्ति नाथ ने कहा, “AWBI से हमारी बस एक ही अपेक्षा है – जो भी आवेदन लंबित हैं, उन्हें शीघ्र निपटाएं। चाहे स्वीकृति दें या अस्वीकृति, लेकिन निर्णय लें।”
AWBI वकील ने कुछ राज्यों द्वारा दिये गए नसबंदी के आंकड़ों में भी गड़बड़ी की बात बताई — एक राज्य में कुत्तों की संख्या कम है लेकिन नसबंदी ज्यादा दिखाई गई है।
7 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि:
- नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उनकी जगह वापस न छोड़ा जाए;
- अस्पतालों, स्कूलों और रेलवे स्टेशनों जैसे संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाकर आश्रय गृहों में भेजा जाए;
- सभी राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा मवेशियों को तत्काल हटाया जाए।
यह मामला मूलतः जुलाई 2025 में शुरू हुआ था जब दिल्ली में बच्चों को कुत्तों के काटने और रेबीज से हुई मौतों की मीडिया रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था।
13 जनवरी 2026 को कोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर कोई राज्य लापरवाही बरतता है तो उससे “भारी हर्जाना” वसूला जाएगा और कुत्तों को खाना खिलाने वालों को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

