केरल में केबल टीवी बाजार में दबदबे के दुरुपयोग की जांच पर रोक से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार, JioStar की याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्ट्रीमिंग सेवा JioStar द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें केरल के केबल टीवी बाजार में कथित दबदबे के दुरुपयोग की जांच को रोकने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि यह मामला अभी प्राथमिक चरण में है और प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) को जांच जारी रखने दी जानी चाहिए।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा, अभी यह जांच शुरुआती चरण में है। रेगुलेटर को जांच करने दीजिए। याचिका खारिज की जाती है।” यह टिप्पणी उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी की दलीलें सुनने के बाद की, जो JioStar की ओर से पेश हुए थे।

रोहतगी ने तर्क दिया कि JioStar टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) अधिनियम, 1997 के अंतर्गत संचालित होता है, जो छूट देने और मूल्य निर्धारण के तरीकों को नियंत्रित करता है। उन्होंने कहा कि जब पहले से ही सेक्टोरल रेगुलेटर (TRAI) इस क्षेत्र को नियंत्रित करता है, तो CCI को समानांतर जांच करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें उनके पक्ष में निर्णय आया था।

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इस पर न्यायमूर्ति पारदीवाला ने टिप्पणी की कि “यह मुद्दा विस्तृत विचार की मांग करता है।” इससे स्पष्ट हुआ कि कोर्ट सेक्टोरल रेगुलेशन के बावजूद CCI की जांच को रोके जाने के पक्ष में नहीं है।

यह मामला एशियानेट डिजिटल नेटवर्क लिमिटेड (ADNPL) की शिकायत पर आधारित है, जिसमें JioStar पर केरल में टीवी ब्रॉडकास्टिंग बाजार में प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। ADNPL का कहना है कि JioStar ने केरल कम्युनिकेटर्स केबल लिमिटेड (KCCL) को अनुचित छूट और प्राथमिकता देकर बाजार में अपना वर्चस्व जमाने की कोशिश की, जिससे उनकी ग्राहक संख्या में भारी गिरावट आई।

TRAI नियमों के अनुसार, ब्रॉडकास्टर्स अधिकतम 35% तक की छूट दे सकते हैं और उन्हें गैर-भेदभावपूर्ण मूल्य निर्धारण नियमों का पालन करना होता है। लेकिन शिकायत के अनुसार, JioStar ने KCCL को अलग-अलग मार्केटिंग और प्रमोशनल समझौतों के जरिए 50% से अधिक की छूट दी, जो ‘शम एग्रीमेंट’ (प्रदर्शनीय लेकिन वास्तविक न होने वाले अनुबंध) माने जा रहे हैं।

JioStar ने इससे पहले केरल हाई कोर्ट में भी जांच पर रोक की मांग की थी, लेकिन हाई कोर्ट ने 3 दिसंबर 2025 को एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपील पर भी अब कंपनी को राहत नहीं मिली है।

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अब CCI के निदेशक-जनरल द्वारा JioStar और उसकी सहायक कंपनियों के खिलाफ केरल टीवी ब्रॉडकास्टिंग क्षेत्र में कथित प्रतिस्पर्धा विरोधी गतिविधियों की जांच आगे जारी रखी जाएगी।

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