मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को अभिनेता विजय की बहुचर्चित फिल्म जन नायकन को सेंसर सर्टिफिकेट देने के एकल पीठ के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले से फिल्म की रिलीज़ को लेकर फिर से अनिश्चितता पैदा हो गई है।
मुख्य न्यायाधीश एम.एम. श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुलमुरुगन की खंडपीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति पी.टी. आशा को आदेश देने से पहले केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को जवाब दाखिल करने का अवसर देना चाहिए था। यह आदेश विजय की उस फिल्म के लिए झटका माना जा रहा है, जिसे उनके राजनीति में सक्रिय प्रवेश से पहले की अंतिम फिल्म बताया जा रहा है।
कोर्ट ने फिल्म निर्माता KVN प्रोडक्शन्स LLP को निर्देश दिया है कि वे मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए पुनः एकल पीठ के समक्ष जा सकते हैं। खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि एकल पीठ यह तय करने के लिए स्वतंत्र है कि CBFC द्वारा फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजने का फैसला सही था या नहीं।
CBFC की चेन्नई क्षेत्रीय इकाई ने 22 दिसंबर 2025 को फिल्म निर्माता को सूचित किया था कि पांच सदस्यीय एग्जामिनिंग कमेटी ने फिल्म को मंजूरी देने और प्रमाणपत्र जारी करने की सिफारिश की है।
लेकिन इसके बाद, उसी समिति के एक सदस्य की शिकायत के आधार पर CBFC की चेयरपर्सन ने 5 जनवरी को फिल्म की प्रक्रिया रोक दी और मामले को पुनरीक्षण समिति (रिवाइजिंग कमेटी) को भेज दिया।
इस फैसले को निर्माता कंपनी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। न्यायमूर्ति आशा ने 9 जनवरी को आदेश पारित करते हुए CBFC को तुरंत सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया और 5 जनवरी की वह चिट्ठी रद्द कर दी, जिसमें फिल्म को पुनरीक्षण समिति को भेजने की बात कही गई थी। हालांकि, उसी दिन खंडपीठ ने इस आदेश पर रोक लगा दी और 20 जनवरी को CBFC की अपील पर फैसला सुरक्षित रखा था।
अब जबकि खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश का आदेश रद्द कर दिया है, मामला दोबारा एकल पीठ के पास पहुंचेगा, जो यह तय करेगी कि शिकायत के आधार पर CBFC द्वारा फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी को भेजना उचित था या नहीं।

