सुप्रीम कोर्ट ने एक 78 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंकर की याचिका पर केंद्र सरकार, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और कई निजी बैंकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उन्हें “डिजिटल गिरफ्त” में रखकर साइबर ठगों ने उनसे करीब ₹23 करोड़ की ठगी कर ली।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने यह नोटिस सेवानिवृत्त बैंकर नरेश मल्होत्रा की याचिका पर जारी किया, जो दिल्ली के गुलमोहर पार्क क्षेत्र में रहते हैं।
मल्होत्रा की याचिका के अनुसार, साइबर अपराधियों ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) और CBI का अधिकारी बताकर यह झांसा दिया कि उनका आधार कार्ड मादक पदार्थ तस्करी, आतंकवाद को वित्तपोषण और पुलवामा हमले जैसे मामलों में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद उन्हें कथित “जांच” के बहाने करीब एक महीने तक घर में बंद रखा गया और किसी से संपर्क करने से रोका गया।
पुलिस के अनुसार, मल्होत्रा को 4 अगस्त 2025 को एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया और उन्हें ड्रग तस्करी से जुड़ा बताया। इसके बाद अलग-अलग लोगों ने ED और CBI अधिकारी बनकर उन्हें धमकाया और बार-बार पैसों के ट्रांसफर के निर्देश दिए।
डर और मानसिक दबाव के चलते मल्होत्रा ने एक महीने के भीतर अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹22.92 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब उन्हें ठगे जाने का एहसास हुआ, तब उन्होंने 19 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई। मामला दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट को सौंपा गया। जांच के बाद अब तक ₹12.11 करोड़ की रकम विभिन्न खातों में फ्रीज़ की जा चुकी है।
अपनी याचिका में मल्होत्रा ने कोटक महिंद्रा बैंक, HDFC बैंक, एक्सिस बैंक, ICICI बैंक, इंडसइंड बैंक, सिटी यूनियन बैंक और यस बैंक को पक्षकार बनाया है और इनसे क्षतिपूर्ति स्वरूप ₹22.92 करोड़ उनकी खातों में वापस जमा कराने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि इन बैंकों की सुरक्षा प्रणालियों में चूक हुई, जिससे इतनी बड़ी राशि ट्रांसफर हो सकी।
यह मामला उन बढ़ते साइबर अपराधों की कड़ी में है, जहां बुजुर्गों को मानसिक रूप से बंदी बनाकर ठगा जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल साक्षरता की कमी और डर का फायदा उठाकर साइबर ठग इस तरह की योजनाएं चला रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई जवाबों के प्राप्त होने के बाद होगी। यह मामला साइबर ठगी के मामलों में बैंकों की भूमिका और उनकी जवाबदेही को लेकर एक अहम कानूनी पड़ाव साबित हो सकता है।

