गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अहमदाबाद के सेवनथ डे एडवेंटिस्ट स्कूल की प्रशासनिक और सुरक्षा खामियों को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। यह वही स्कूल है जहाँ 19 अगस्त, 2023 को कक्षा 10 के एक छात्र की उसके सहपाठी द्वारा चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद राज्य सरकार ने स्कूल का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया था।
जस्टिस निर्जर देसाई की पीठ स्कूल प्रबंधन द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें ज़िला शिक्षा अधिकारी (DEO) द्वारा स्कूल का नियंत्रण अपने हाथ में लेने के आदेश को चुनौती दी गई थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा, “क्या कोई अभिभावक, जिसे स्कूल की प्रशासनिक खामियों और राज्य सरकार द्वारा उठाई गई चिंताओं की जानकारी हो, अपने बच्चे को ऐसी संस्था में पढ़ाना चाहेगा?”
राज्य सरकार ने स्कूल प्रबंधन को फिलहाल कोई राहत देने का विरोध किया। सरकारी अधिवक्ता जीएच वीर्क ने बताया कि दिसंबर के मध्य से स्कूल ने बार-बार कहने के बावजूद कोई आवश्यक दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं कराए हैं। स्कूल पर यह भी आरोप लगा कि वह नकद में फीस वसूल रहा है और वित्तीय दस्तावेज़ भी अब तक नहीं दिए गए हैं।
सरकार की ओर से बताया गया कि छात्रों की सुरक्षा के हित में नए दाखिलों पर रोक लगाई गई है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि महज़ ‘सहयोग’ का दावा करना पर्याप्त नहीं है और न ही इससे यह माना जा सकता है कि स्कूल ने वाकई में सहयोग किया है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “किसी भी प्रकार का मुआवज़ा उस बच्चे की मौत की भरपाई नहीं कर सकता और न ही उसके माता-पिता के टूटे हुए सपनों को वापस ला सकता है।”
जस्टिस देसाई ने स्कूल प्रबंधन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे शिक्षा को केवल ‘धंधा’ समझा जा रहा है। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “जब एक बार यह साफ हो गया कि स्कूल अपने छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सका, तो न्यूनतम नैतिकता यह कहती है कि प्रबंधन को खुद ही पीछे हट जाना चाहिए था।”
मृतक छात्र सहित अन्य अभिभावकों का एक संगठन भी अब इस मामले में पक्षकार बनने के लिए आगे आया है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी को तय की है।

