जज के फर्जी हस्ताक्षर कर दो क़ैदियों को करवाया रिहा, कोर्ट के लिपिक ने…

उत्तरप्रदेश—-एटा जिला जेल में निरुद्ध दो क़ैदियों को जज के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर बेल पर रिहा करवा लिया गया। पोक्सो एक्ट के इन दोषियों को रिहा कराने के लिए कोर्ट के ही एक लिपिक ने फर्जी आदेश बनाए। पूरा मामला जानकारी में आने के पर डिस्ट्रिक्ट जज ने जांच पड़ताल कराई तो लिपिक का दोष सिध्द हो गया।आरोपी लिपिक के विरुद्ध कोतवाली नगर थाने में दो रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

जिला जज मर्दुलेश कुमार सिंह के आदेश और अपर जिला जज कैलाश कुमार की जांच रिपोर्ट आने के उपरांत पेशकार अज्ञान विजय की तरफ से तहरीर देकर केस दर्ज कराया है। इसमें आरोप है कि न्यायालय विशेष न्यायाधीश पोक्सो प्रथम में नियुक्त लिपिक मनोज कुमार ने जज कुमार गौरव के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर जेल में बंद आरोपी उमेश कुमार को रिहा कराया।

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आरोपियों के विरुद्ध दर्ज मुकदमे—-आरोपी उमेश कुमार पर एक किशोरी की किडनैपिंग,पोक्सो और एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है। दूसरा केस अपर जिला एंव सत्र न्यायालय रेप व पोक्सो प्रथम के पेशकार नवरत्न सिंह ने लिपिक मनोज कुमार के विरूद्ध दर्ज कराया है। इसमें विकास बघेल को 9 दिसंबर 2020 को फर्जी हस्ताक्षर से आदेश तैयार कर बरी कराने का आरोप है। विकास बघेल पर दुष्कर्म और पोस्को एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज है। 

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फर्जी आदेश पर दो क़ैदियों के रिहा होने के मामले का खुलासा हुआ तो पुलिस प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। इस संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह ने बताया है कि न्यायिक कर्मचारी की तहरीर के आधार पर एक कर्मचारी के खिलाफ दो रिपोर्ट दर्ज की गई है। दोनों मामलों में जांच शुरू करा दी गई है। 

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